प्रख्यात साहित्यकार डा॰ हरीश नवल, दिल्ली
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
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“वाणी नहीं संस्कार बोलते हैं” यह बात मुझे तब तब सच लगी है जब जब मैने भाई राजेश चेतन की वाणी सुनी है, उनके भीतर का तेजोमय रूप उनके मुखारविन्द पर छा जाता है जो मुझे बहुत भाता है। एक संस्कारी विरासत की भव्यता को उन्होंने जिस तरह अपने काव्य में समेटा है, प्रशंसनीय है। राजेश के सरोकार राष्ट्र के उत्थान के सरोकार हैं। वह एक अति आधुनिक व्यक्ति होने के बावजूद भारतीयता को जीवित और जीवंत रखे हुए हैं। उनके भीतर का जोश और जुनून तथा उनके प्रदत्त साहित्य का उद्देश्य बहुत महत्वपूर्ण है। वे उसी सम्पन्नता के वाहक बन पश्चिम और पूर्व का फ्यूज़न रूप प्रस्तुत करते रहें, ऐसी शुभेच्छा हैं। |
