श्रीमती मधु मोहिनी उपाध्याय, दिल्ली
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
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चेतन में चेतना ही नही संचेतना है। वे जैन हैं इसलिये बेचैन है-पाश्चात्य संस्कृति के अंधा अनुकरण के कारण। इस कारण राजेश जी अल्पायु मे ही हिन्दी काव्य जगत मे प्रदीप्त उन नक्षत्रों की श्रेणी मे पहुँच चुके हैं जहाँ तक पहुँचने मे जीवन लग जाता है फिर भी लक्ष्य अलभ्य ही रह जाता है। उदार चिन्तता, सत्यवादिता, स्पष्टवादिता, ओजस्विता, उर्जस्विता उनके चरित्र के प्रधान गुण हैं, इस कारण वे मेरे अभिन्न मित्र हैं। http://madhumohini.com |
