कविवर श्री अभिनव शुक्ला, यू॰ एस॰ ए॰
Apr 25th, 2007 by Rajesh Chetan
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ओज भरी वाणी में गर्जन सी कविताएँ, सत्य, धर्म, मानवता की बगिया महकाएँ, बगिया महकाएँ झूमे मौसम का सरपंच, ‘चेतन’ हो चहके जीवन का हर परपंच, कलम करे नित अद्भुत सी वनवासी खोज, दिग दिगन्त तक गूँजे गर्जित गर्वित ओज। http://kaviabhinav.com |
