कविवर श्री मंगल नसीम, दिल्ली
Jul 23rd, 2007 by Rajesh Chetan
| एक कवि सम्मेलन में मैंने पहली बार राजेश ‘चेतन’ को सुना। सुदर्शन व्यक्तित्व, सम्मोहक आँखों, धनुष की टंकार-सी आवाज़ और सुन्दर प्रस्तुतिकरण ने श्रोताओं पर जादू सा कर दिया था मानो। पूरा पंडाल मंत्रमुग्ध था। युवा कवि के शब्द-शब्द से उसका आत्म-विश्वास छलक पड़ रहा था। हर व्यक्ति सम्मोहन की स्थिति में था। कार्यक्रम की समाप्ति पर आपस में परिचय हुआ और हर मुलाकात के बाद यह ऊर्जावान युवा कवि मेरे दिल में घर करता गया। |