डा॰ कुमार विश्वास, गाजियाबाद
Jul 23rd, 2007 by Rajesh Chetan
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कविवर श्री राजेश चेतन की कविताएँ जाड़ों की उस कच्ची, गुनगुनी धूप का आभास देती हैं, जिसे आँख खोल कर जाँचने-परखने में नहीं अपितु हल्की तन्द्रा में जिसके स्पर्श को अन्तरतम तक अनुभूत करने में जो सुख है, वह शब्दातीत है। http://kumarvishwas.com |
