कविवर श्री अब्दुल अयूब गौरी, जयपुर
Aug 27th, 2007 by Rajesh Chetan
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संस्कारवान व्यक्ति की कलम से संस्कारो को सुगन्धित करती हुई लेखनी के प्रति मेरी बधाइयाँ । हिंदी साहित्य के लम्बे काफिले का यह पैदल सिपाही हिंदी का ध्वज लिए गांव – गांव ढाणी ढाणी से लेकर सात समुंदर पार तक हिन्दी का ध्वज फहराकर आया है। हिंदी भाषा की बिन्दी लगाई है| हिंदी भाषा हमारी मातृभाषा, राष्ट्रभाषा है। राष्टृभाषा के प्रति विश्वास जगाने वाली राजेश चेतन की लेखनी को बधाई| |
