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Archive for September, 2007

राजेश चेतन एक ऊर्जावान युवा कवि हैं, जिन्हें निःसन्देह
‘ओज का कवि’ कहा जा सकता है। मैंने उनकी कविता को निरन्तर
निखरते हुए देखा है। कविता लेखन में वे एक बेहद ईमानदार और
मौलिक कवि हैं। उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता उनकी कविताओं में मुखर
रूप से सामने आती है। इस मायने में वे बिना लागलपेट के, बिना
किसी की परवाह किए […]

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किसी भी बड़े रचनाकार को पहचान व प्रतिष्ठा एक दिन
में नहीं मिलती। इसके पीछे उसका लक्ष्य, संघर्ष, कर्तव्यनिष्ठा
व ईमानदारी साथ रहती है। संघर्ष से मिली सफलता स्थायी
रहती है, बशर्ते किसी भी प्रकार के अभिमान में वह रचनाकार
नहीं आए। ऐसे ही रचनाकार-काव्यधर्मी हैं श्री राजेश चेतन।
आज वह सफलता के जिस मुकाम पर खड़े हैं, वह उनके
संघर्ष […]

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राजेश चेतन अपने आप में एक बहुमुखी प्रतिभा के
अदभुद व्यक्ति हैं। मेरी इनकी पहचान वर्षों पुरानी है उनका
एक मानवीय गुण है कि जिसका कोई नहीं होता है उसको
सहारा देते हैं मैं स्वयं इसका एक उदाहरण हूँ। राजेश चेतन
ने जो लिखा वह उनकी मौलिकता का परिचायक हैं जब वे
मुझसे मिलते हैं, मैं अभिभूत हो जाता हूँ। […]

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मैंने प्रिय राजेश चेतन का पूरा काव्य जीवन अपनी
आँखों से देखा है। प्रारम्भ से लेकर अब तक राजेश की
काव्य प्रतिभा हर रोज निखरती रही है। वो आज हजारों
हजारों लोगों के हृदय में उतरता है। वह आज मंच का
बहुत-बहुत सफल कवि है। इसके साथ ही वह बहुत
अच्छा मित्र, बहुत अच्छा व्यक्ति भी है। मैं उसके
बहुत-बहुत उज्जवल […]

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पहली मुलाकात में ही आत्मीयता से विभोर कर देने
वाले रस-मर्मज्ञ कवि राजेश चेतन निश्चित ही कविता के
कुरुक्षेत्र में अपने सूर्य रथ पर आरुढ हो अपनी आभा का
नव्य एवं चैतन्य आभास देने में सक्षम सिद्ध हुए हैं।
इनकी कविताओं में जीवन मूल्यों के प्रति आस्था,
विसंगतियों-विडम्बनाओं-विद्रूपताओं के प्रति चैतन्य
व्यंग्य-धर्मिता सहज ही प्रतिबिंबित होती है।
भौतिक एवं सामाजिक प्रतिबद्धता के […]

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राजेश चेतन जी उन रचनाकारों में से हैं जिन्हे
सुनना, पढ़ना और जिनसे मिलना तीनो ही सुखद
अनुभव हैं। उनसे मिलकर यह निर्णय करना मुश्किल
है कि वे कवि अधिक बडे है या इन्सान। ये खूबी मंच
के चुनिंदा कवियों को ही प्राप्त है। राजेश चेतन उन
रचानाकारों में है जिन्होने राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं वरन्
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी […]

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राजेश चेतन आधुनिक हिन्दी मञ्चीय कविता का एक ऐसा
सशक्त नाम है जिनके शब्दों में केशव के पाञ्चजन्य की गूँज है।
परिवर्तन की क्षमता है। क्रान्ति की लपटें है। असत्य, अशिव और
असुन्दर को चुनौती है। सत्यम शिवम सुन्दरम की स्थापना का
संकल्प है। उनके स्वर में एक ओर रणभेरी का प्रखर नाद है
तो दूसरी ओर गीत की गंगा […]

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