ड़ा॰ अर्जुन सिसौदिया, गुलावटी
Sep 5th, 2007 by Rajesh Chetan
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राजेश चेतन आधुनिक हिन्दी मञ्चीय कविता का एक ऐसा सशक्त नाम है जिनके शब्दों में केशव के पाञ्चजन्य की गूँज है। परिवर्तन की क्षमता है। क्रान्ति की लपटें है। असत्य, अशिव और असुन्दर को चुनौती है। सत्यम शिवम सुन्दरम की स्थापना का संकल्प है। उनके स्वर में एक ओर रणभेरी का प्रखर नाद है तो दूसरी ओर गीत की गंगा का कल कल निनाद। कविता की यह धारा अक्षुण्ण रहे अबाध बहे, इसी शुभकामना के साथ। |
