कविवर श्री योगेन्द्र मौदगिल, पानीपत
Sep 10th, 2007 by Rajesh Chetan
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पहली मुलाकात में ही आत्मीयता से विभोर कर देने वाले रस-मर्मज्ञ कवि राजेश चेतन निश्चित ही कविता के कुरुक्षेत्र में अपने सूर्य रथ पर आरुढ हो अपनी आभा का नव्य एवं चैतन्य आभास देने में सक्षम सिद्ध हुए हैं। इनकी कविताओं में जीवन मूल्यों के प्रति आस्था, विसंगतियों-विडम्बनाओं-विद्रूपताओं के प्रति चैतन्य व्यंग्य-धर्मिता सहज ही प्रतिबिंबित होती है। भौतिक एवं सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ-साथ, छदम- आवरणों से दूर, कोसों दूर निरन्तर अपने लक्ष्य को साधते इस कलम वीर का मैं स्वागत एवं अभिनन्दन करता हूँ। राजेश चेतन इसी राकेटीय-गति से बढते जाएं…… यही शुभकामनाएं……शुभकामनाएं |
