कविवर श्री महेन्द्र शर्मा, दिल्ली
Sep 19th, 2007 by Rajesh Chetan
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किसी भी बड़े रचनाकार को पहचान व प्रतिष्ठा एक दिन में नहीं मिलती। इसके पीछे उसका लक्ष्य, संघर्ष, कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी साथ रहती है। संघर्ष से मिली सफलता स्थायी रहती है, बशर्ते किसी भी प्रकार के अभिमान में वह रचनाकार नहीं आए। ऐसे ही रचनाकार-काव्यधर्मी हैं श्री राजेश चेतन। आज वह सफलता के जिस मुकाम पर खड़े हैं, वह उनके संघर्ष की जीती जागती तस्वीर है। मैंने राजेश चेतन को अपने सामने ज़मीन से उठते हुए आकाश को छूते हुए देखा है। यानि कि एक साधारण से कवि को जन मानस का कवि बनते। प्रत्येक विद्या में उन्होने अपनी लेखनी चलाई है। वह जन समस्याओं से बेख़बर होने वाले कवि नहीं है, बल्कि समस्याएं पैदा करने वालों को ख़बरदार करने वाले सिद्धहस्त कवि भी हैं। राजेश चेतन में मैंने जो रचना धर्मिता से अलग विशेषता देखी, वह है एक सहज, निष्छल, ईमानदार व सबकी मदद के लिए सदा तैयार रहने की उनकी मानवीयता, जो आज के दौर में बहुत कम मिलती है। एक सहज इन्सान के साथ, गुणी व रचनात्मक कलमकार होना कवि राजेश चेतन की अक्षय पूंजी है। उनकी रचनाएं स्वयं का बोध कराने वाली दिशाबोधक ज्योति है, जो कभी नहीं बुझेगी। |
