कविवर श्री नरेश शांडिल्य, दिल्ली
Sep 24th, 2007 by Rajesh Chetan
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राजेश चेतन एक ऊर्जावान युवा कवि हैं, जिन्हें निःसन्देह ‘ओज का कवि’ कहा जा सकता है। मैंने उनकी कविता को निरन्तर निखरते हुए देखा है। कविता लेखन में वे एक बेहद ईमानदार और मौलिक कवि हैं। उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता उनकी कविताओं में मुखर रूप से सामने आती है। इस मायने में वे बिना लागलपेट के, बिना किसी की परवाह किए अपनी सोच को कविता में ढालने की क्षमता और दक्षता रखते हैं। ऐसा बहुत कम लोग कर पाते हैं, इसलिए भी राजेश चेतन ‘कवियों की भीड़’ में अलग से पहचाने जा सकते है। बेशक वे ‘किताबी अथवा अकादमिक कवि’ न हों, लेकिन कविता की वाचिक परम्परा को निभाते हुए उन्होंने कवि सम्मेलनों के मंचों पर अपना एक विशिष्ट स्थान बना लिया है और उस ‘विशिष्ट-आसन’ को वे और अधिक सम्मानजनक बनाने में जुटे हैं। उनमें अभी भी अपार सम्भावनाएं हैं। कुल मिलाकर मैं उन्हें ‘दिनकर की परम्परा का कवि’ कहना चाहूंगा। राष्ट्रीय चेतना का अलख जगाने में लगे इस युवा कवि को मैं बहुत आगे जाता हुआ देखना चाहता हूँ। ईश्वर उनकी कलम को तलवार जैसी धार प्रदान करे, ऐसी उम्मीद और सदभावना के साथ |
