कविवर श्री दिनेश बांवरा, मुंबई
Posted in अपनो की नज़र में on Dec 6th, 2007 No Comments »
भईया आपसे पहली मुलाकात उतने ही समय की थी जितने
समय में एक मोहनी एक भोले-भाले नवजवान को अपना बना लेती
है परंतु दूसरी मुलाकात उतनी ही लम्बी, जितने लम्बे समय के बाद
एक प्रेमी दूसरी प्रेमिका कि तलाश करने लगता है।
भईया आपके अन्दर जो सरलता है वह आकर्षण का कारण है
परंतु कविता […]