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Archive for December, 2007

भईया आपसे पहली मुलाकात उतने ही समय की थी जितने
समय में एक मोहनी एक भोले-भाले नवजवान को अपना बना लेती
है परंतु दूसरी मुलाकात उतनी ही लम्बी, जितने लम्बे समय के बाद
एक प्रेमी दूसरी प्रेमिका कि तलाश करने लगता है।
भईया आपके अन्दर जो सरलता है वह आकर्षण का कारण है
परंतु कविता […]

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