कविवर श्री दिनेश बांवरा, मुंबई
Dec 6th, 2007 by Rajesh Chetan
![]() |
भईया आपसे पहली मुलाकात उतने ही समय की थी जितने समय में एक मोहनी एक भोले-भाले नवजवान को अपना बना लेती है परंतु दूसरी मुलाकात उतनी ही लम्बी, जितने लम्बे समय के बाद एक प्रेमी दूसरी प्रेमिका कि तलाश करने लगता है। भईया आपके अन्दर जो सरलता है वह आकर्षण का कारण है परंतु कविता के प्रति चेतन अवस्था आप के नाम को सार्थकता प्रदान करती है। कभी कृष्ण बांसुरी का मधुरिम स्वर तो कभी शिव-तांडव का नाद आप की कविता में समय-समय पर सुनाई पडता है जो समाज, सभ्यता, संस्कृति को नई ऊंचाईयां प्रदन करने की छटपटाहट के साथ होता है। भईया मंच रणभूमि है, आप हमारे सेनापति है, कविता हथियार है और इस संग्राम में मुझ जैसे छोटे सिपाही को आपने आदर दिया, आप का कोटि-कोटि धन्यवाद। भईया भविष्य में मेरी कमियों से मुझे पहले अवगत कराईयेगा, इनाम बाद में दीजियेगा। आपका अनुज रूप में स्वीकार करना ही मेरे लिये एक उर्जा स्त्रोत है। ईश्वर आपको धन-धान्य, कला, कलम कविता से ओत-प्रोत रखे, यही प्रार्थना |
