Feed on
Posts
Comments

मुख पृष्ठ  |  परिचय  |  चित्र-दीर्घा  |  पुस्तकें  |  आडियो-विडियो  |   अपने मित्र को बताएं  |  अपनों की नज़र में  |  प्रेस  |  सम्पर्क  |   My Blog

Archive for February, 2008

राजेश चेतन एक ऐसे कवि हैं जो हिन्दी भाषा और
साहित्य के विकास में जी जान से जुटे हैं। वे पूरी निष्ठा
और लगन से भारतीय संस्कृति की पूजा में निमग्न है
और ये आराधना वे सहित्य के माध्यम से कर रहे हैं।
उनकी संचालन क्षमता और प्रबन्धन क्षमता स्तुत्य और
सराहनीय है। कवि सम्मेलनों में जब वे अपनी कविताओं
के […]

Read Full Post »

राजेश चेतन मूलतः राष्ट्रीय चेतना के कवि हैं। उनकी रचनाओं की
ओजस्वी हुंकार में मातृभूमि, घर, प्यार और देश की अस्मिता से
समर्पित संस्कारों की उदबोधन भरी पुकार है। देश की मिट्टी की
सौंधी सुगंध से उनकी रचनायें सुवासित हैं। वे हंसाते हंसाते भी
व्यंग्यमयी शैली में राष्ट्रीय गौरव की गरिमा का संदेश देना नहीं भूलतें।
कविता चेतन के लिये […]

Read Full Post »

प्रियवर राजेश ‘चेतन’ नई पीढ़ी के एक ऐसे ही संस्कारवान व्यक्ति हैं
जिनकी कविता के प्रति प्रतिबद्धता, समर्पण व आस्था उनके व
हिन्दी मंचीय कविता के भविष्य के प्रति आश्वस्त करती है।
http://hariompanwar.com

Read Full Post »

हरियाणा के गौरव तथा देश के ओजस्वी कवि राजेश चेतन
ने राष्ट्रीय ही नहीं, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर भारतीयता एवम्
राष्ट्रीयता का सन्देश अपनी कविताओं के माध्यम से देश-विदेश
में घूम-घूम कर तो पहुँचाया ही है, अब वेब-साइट द्वारा विश्व के
समस्त हिन्दी कविता प्रेमियों के लिये सुलभ कर दिया है। मेरी
हार्दिक मंगल कामना है कि इस अन्तर्राष्ट्रीय माध्यम […]

Read Full Post »

मैं तुम्‍हारी प्रगति का साक्षी हूं। तुम्‍हारे निरंतर बढ़ते पग,
पाठकों का ध्‍यान आकृष्‍ट कर रहे हैं। मैं प्रसन्‍न हूं कि सामाजिक
और राजनीतिक घटनाएं तत्‍काल तुम्‍हारी कलम को पकड़ लेती हैं;
और तुम उन्‍हें कलात्‍मक ढंग से अपने पाठकों तक पहुंचा देते हो।
http://www.narendrakohli.org

Read Full Post »

तरुणाई को दे दिशा, जिसका शब्द सृजन
जड़ता को चेतन करें, वो कवि है “चेतन”
सुप्त भावनाओं पर जमी जड़ता की ठंडी राख को हटा कर
राष्ट्रवाद की उष्मा को चैतन्यता देने वाले शब्दों के शिल्पी
प्रिय मित्र राजेश चेतन को बहुत-बहुत शुभकामनायें

Read Full Post »

अच्छे कवि होने की पहली शर्त है अच्छा इंसान होना और
ये विशेषता राजेश जी में है। वे बाहर से जितने रूक्ष दिखते हैं
अन्दर से उतने ही स्निंग्ध हैं। उनकी कुछ विशेष कविताओं का
मैं प्रशंसक भी हूँ।

Read Full Post »