डा॰ कुंअर बेचैन, गाजियाबाद
Feb 9th, 2008 by Rajesh Chetan
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राजेश चेतन एक ऐसे कवि हैं जो हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में जी जान से जुटे हैं। वे पूरी निष्ठा और लगन से भारतीय संस्कृति की पूजा में निमग्न है और ये आराधना वे सहित्य के माध्यम से कर रहे हैं। उनकी संचालन क्षमता और प्रबन्धन क्षमता स्तुत्य और सराहनीय है। कवि सम्मेलनों में जब वे अपनी कविताओं के विविध रंग बिखेरते है तो श्रोता उनके ही रंग में रंग़ जाते हैं। वे जनता के हृदय में सीधे उतरते हैं और वर्तमान समय की अनेक समस्याओं को निडर होकर उजागर करते हुए उन पर अपनी दिशा निर्देशक राय भी देते चलते हैं। हंसी-हंसी में गहरी बात कहना कोई उनसे सीखे। कभी-कभी वे ऐसा व्यंग़्य कर देते है की पाठक और श्रोता सोचता ही रह जाता हैं कि अरे यह तो रोजाना की देखी-सुनी बात थी और हमारा ध्यान नहीं गया। अनेक देशों की यात्रा करने के पश्चात भी वे भावनाओं से पूरी तरह भारतीयता के समर्थक है। उनका विश्वास है कि हिन्दी कविता में वो शक्ति है कि वो देश-विदेश में उन मानवीय संस्कारों को सुरक्षित रख सकती है जिनकी आज कि दुनिया में बहुत जरुरत है। ऐसे विनम्र इन्सान, मानव धर्म के संपोषक तथा श्रेष्ठ कवि को मेरी कोटि-कोटि शुभकानायें। |

लाल हुई है भारत की धरती,मानवता है तिल तिल मरती! न जाने क्यों शासन चुप है,दानवता के आगे गुमसुम है !नपुंसक प्रशासन की चुप्पी जनमानस को खलती है, शायद आतंकवाद की आग शासन के सर पर ही फलती है!मेरे भारतियो की लाशों का मोल भाव वो करते है,हर बम्ब विस्फोट के बाद वो कुछ नोटों के टुकड़े,लाशों के टुकडों पर ही रखते है!आज जरूरत खुद्दारी की है,आतंकवाद पर तलवारी की है!फिर क्यों खामोश हुए है लब सबके,क्यों आतंकवाद के शोर में शमशानों सा सन्नाटा है!क्या शासन पंगु हो चला है,या किन्नरों ने देश संभाला है!
i read your poem i wanna some poem can u mail me on my email address it’s my requst to u so pls sent