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	<title>चलते-चलते</title>
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	<description>कवि राजेश चेतन</description>
	<pubDate>Wed, 03 Oct 2007 10:43:36 +0000</pubDate>
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		<title>यू के यात्रा</title>
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		<pubDate>Mon, 01 Oct 2007 12:17:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Rajesh Chetan</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[चलते-चलते]]></category>

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		<description><![CDATA[दिनाँक – 21-08-2002 को प्रातः 8-45 बजे के एल एम से यू के राजधानी लन्दन पहुचें। एयरपोर्ट पर श्री पदमेश गुप्ता व श्री अनिल शर्मा उपस्थित थे । एयरपोर्ट पर चाय पीने के बाद श्रीमती सरोजनी प्रीतम को श्री पदमेश गुप्ता के घर छोड़कर मै और गजेन्द्र जी आनेलगी के निवास नार्थ वेम्बले पहूँचे । [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>दिनाँक – 21-08-2002 को प्रातः 8-45 बजे के एल एम से यू के राजधानी लन्दन पहुचें। एयरपोर्ट पर श्री पदमेश गुप्ता व श्री अनिल शर्मा उपस्थित थे । एयरपोर्ट पर चाय पीने के बाद श्रीमती सरोजनी प्रीतम को श्री पदमेश गुप्ता के घर छोड़कर मै और गजेन्द्र जी आनेलगी के निवास नार्थ वेम्बले पहूँचे । घर पर विश्राम करने के बाद कृति संकल्प को साथ लेकर लंदन भ्रमण बैकर्लो ट्रेन हाटा सैन्ट्रल लंदन के लिए प्रस्थान किया व सबसे पहले ट्राफलगर स्क्योर पंखा जहाँ कबूतर फव्वारे व अंग्रेजों के विजय अभियान के प्रतीक थे वहाँ से हमने विक्टोरिया पुराना महल देखा जहाँ आज भी पुराने रीती रिवाजो के अनुसार सुरक्षा कर्मी लोगो का मनोरंजन करते हैं उसके बाद प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के घर का बाहर से मुयायना किया और फिर सीधे यू के पार्लियामेन्ट को देखा जो कि कलाल की दृष्टि से बहुत ही सुन्दर बना है उसके साथ घण्टाघर जो कि कलश से जड़ित है इस का विश्व गिनीज बुक में नाम दर्ज है फिर हमने दुनिया का सबसे बड़ा झूला जिसका नाम लंदन आई आर मिल्लेनियम व्हील के नाम से जाना जाता है जो कि थामस नदी के किनारे बनाया गया है झूला बहुत ही सुन्दर है ब्रीज वाटर्लिओ से हमने अनिल जी कार्यालय भारत भवन की ओर प्रस्थान किया तथा अनिल जी के साथ कन्वर्ट गार्डेन देखा ये लंदन का सांस्कृतिक केन्द्र है जहाँ अलग अलग कलाकार अपनी कला के प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिये फिर हम बस द्वारा स्टर्न स्टेशन गये जहाँ पर हम डाँ अग्रवाल व श्री सुरेश शर्मा (press BJPlandon ) से काफी हाऊस में चर्चा हुई ये दोनो हि यहाँ काफी सक्रिय है फिर ट्रेन द्वारा हम सब घर आ गये जहाँ रात्रि में भोजन व कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया था गोष्ठी में क्वि व कुछ पारिवारिक लोग उपस्थित थे श्री पदमेश गुप्ता श्रीमती व श्री बुध्दिराजा श्रीमती व श्री संजीव जी व शहीद भगत सिंह की भतीजी श्रीमती नरेश भारतीय संस्कार भारती यू के अध्यक्ष श्री म श्री राजीव गोयल नार्वे से डाँ सुरेश मिश्रा, सुश्री मीनू श्री रमेश मुरादाबादी वैश्य उपस्थित थे। श्री गजेन्द्र सोलंकी के संचालन एक यादगार कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमे रक्षाबन्धनौर विश्वविजयी भारत नामक कवितायें मैने सुनाई ।</p>
<p>दिनांक 22-08-2002</p>
<p>प्रातः 11-00 बजे भारत के सभी कवि व श्रीपदमेश गुप्ता, सुरेश मिश्रा, स्मृति अस्थाना के साथ यू के लन्दन का ऐतिहासिक स्थल winder costel देखने गये बहुत ही सुन्दर स्थान है जहाँ tamps river के सामने बने पिकनिक पार्क में भोजन करने के बाद वहाँ श्री रमेश वैश्य की गाड़ी द्वारा श्रीमती उषा राजे के निवास स्थान साऊथ लन्दन पहूँचे जहाँ एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया था श्री सक्सेना जी ने सभी कवियों का अभिनन्दन किया व बाद में श्री सोहन राही की अध्यक्षता व श्री पदमेश गुप्ता के संचालन में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । इस गोष्ठी में भारत के कवियों के अलावा प्रवासी कवि श्री रमेश वैश्य, बी बी सी के श्री अरुण अस्थाना व श्रीमती स्मृति अस्थाना ने भीइ सुन्दर काव्य पाठ किया स्वादिष्ट भोजन के बाद रात्रि 11-30 बजे साऊथ लन्दन से चलकर रात्रि 1-00 बजे हम श्री अनिल शर्मा के निवास पहूँचे ।</p>
<p>दिनांक &#8212; 23-08-2002</p>
<p>प्रातः 11-00 बजे श्री अनिल शर्मा के निवास से भारत व प्रवासी कवि (श्रीमती मधु चतुर्वेदी, श्री विजेन्दर शर्मा) के काफिले ने काव्य यात्रा का आरम्भ किया। एक गाड़ी जिसके ड्राईवर हेनरी थे। यात्रा में बहुत ही सुन्दर यू के के दृश्य दिखाई दिये 11-00 बजे चलने के बाद रास्ते में दुर्घटना के कारण 3-00 बजे श्री प्राण शर्मा के निवास covartuing पहुँचे श्री प्राण शर्मा एक प्रतिष्ठित गज़ल्कार है उन्होने सभी कवियों क अभिनन्दन किया व सबको भोजन करने के बाद हम लोग bradfard के लिए प्रस्थान किया यात्रा जाम व ठीक से पता नही होने कारण रात्रि 7-00 बजे bardfrjjjk में हिन्दु कल्चरल सोसाईटी के मंदिर जो की लीडस में पहूँचे वहाँ हिन्दु स्वयंसेवक संघ की शाखा को देखने का भी सौभाग्य मिला व बाद में 8-00 बजे लगभग एक सौ पचास(150) लोगो की उपस्थित में कवि सम्मेलन आरम्भ हुआ इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता डाँ सरोजिनी प्रीतम व संचालन श्री जितेन्दर शर्मा ने किया । श्री हंसमुख व डाँ महेन्द्र वर्मा ने बताया कि wall end होने कारण संख्या कुछ कम है अथवा और अधिक लोग आते। हिन्दु कल्चरल सोसाईटी ने एक अच्छा मंदिर बनाया है व अब संकल्प लिया है कि आने वाले समय में श्री सोमपुरा के वास्तुकला निदेशन में एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जायेगा कवि सम्मेलन बहुत सफल रहा । विश्वविजयी भारत, रक्षाबन्धन व गुजरात कविता को प्रस्तुत किया बाद में भोजन के समय लोगो ने कविताओं पर काफी प्रतिक्रिया व्यक्त की । भारत को भारत रहने दो पुस्तकें भी कुछ लोगो ने खरीदी रात्रि में श्री अनिल शर्मा – कृति, गजेन्द्र के साथ भिवानी की डाँ सुगन्ध (भगवती) के घर विश्राम किया उनका भतीजा रमेश ने बहुत ही डाँ सुगन्धा भिवानी में निवास करती थी व मास्टर प्यारे लालजी से परिचित हैं बहुत ही सुन्दर निवास है डाँ सुगन्धा का 82 वर्ष की अवस्था होने के बाद भी वह युवको की तरह सक्रिय हैं ।</p>
<p>दिनाँक &#8212; 24-08-2002</p>
<p>प्रातः सुगन्धाजी के निवास से रमेश सुगन्धा की गाड़ी में york university देखते हुये हम लोग श्री महेन्द्र वर्मा के निवास भोजन के लिये गये भोजन भारतीय स्वाद से परिपूर्ण था भोजन के बाद हमने मानचेस्टर को प्रस्थान किया जहाँ देखा जिसकी सुन्दरता का वर्णन शब्दों से नही किया जा सकता trafea parce यहाँ एक होटल में कवि सम्मेलन का आयोजन डाँ अंजनी कुमार व श्रीमती श्यामा कुमार के संयोजन में किया गया था bank hoediday व विवाह समारोह अधिक होने के कारण संख्या काफी कम थी कवि सम्मेलन मेरे संचालन मे सफ़ल रहा । रात्रि को डाक्टर अंजनी कुमार के निवास पर विश्राम किया । अंजनी जी का पूरा परिवार भाषा व भारतीयता के प्रति समर्पित है बहुत ही सम्मान किया सब लोगों का</p>
<p>दिनाँक – 25-08-2002</p>
<p>प्रातः डाक्टर अंजनी कुमार के घर नाश्ता करने के बाद हम लोग दुनिया का सबसे बडा बाजार ट्रेफेड पार्क देखने गये जिसकी सुन्दरता का शब्दों मे वर्णन नही किया जा सकता। ट्रेफेड पार्क में भ्रमण के बाद डाँ अंजनी कुमार के घर भोजन करने के बाद बर्मिंघम के लिये प्रस्थान किया जहा आज समाज मिशन मे गीतांजली बहुभाषी समुदाय का और श्री कृष्ण कुमार व श्रीमति चित्रा जी द्वारा कवि सम्मेलन का संयोजन किया । कवि सम्मेलन काफी सफ़ल रहा। रात्रि मे एक परिवार में ठहरने का रहा जो कि उस समय यू के मे नही था श्री कृष्ण कुमार ने सब व्यवस्था की। श्रीमति चित्रा के घर पर चलने के कारण उन्होने श्रीमति कंचन जैन के घर कवियो के नाश्ते का प्रबंध किया।</p>
<p>दिनाँक – 26-08-2002</p>
<p>प्रातः नाश्ते के बाद श्री कृष्ण कुमार श्रीमति चित्रा व श्रीमति कंचन जैन के साथ शैक्सपीयर जन्म स्थान देखने गये बहुत ही सुन्दर व इतिहासिक स्थान है ये स्थान देखने के बाद हमने भारतीय विधा भवन लन्दन के लिये प्रस्थान किया जहां पर यू के हिन्दी समिति व भारतीय उच्चायोग द्वारा कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया था। मुख्य अतिथि श्री रोनिन सेन थे डाँ सुनील जोगी ने कुशल मंच संचालन किया भारतीय विधा भवन बहुत ही सुन्दर स्थान है जो कि एक चर्च खरीद कर बनाया गया है लंदन का कवि सम्मेलन करने के बाद श्री नवकेश पाल के निवास जो कि एक हिन्दुवादी परिवार है जिनके घर में एक संस्कार केन्द्र चलता है उनकी धर्म पत्नी शशी भी उन्ही के विचार के साथ इस केन्द्र को चलाती है इस परिवार के एक कमरे मे ही संस्कार भारती यू के का जन्म हुआ था। रात्रि श्री अनिल शर्मा के साथ इनके निवास पर आना हुआ।</p>
<p>दिनांक –27-08-2002</p>
<p>प्रातः अनिल जी के निवास से श्री पदमेश गुप्ता के साथ अरुण अस्थाना के निवाससे डाँ॰ जोगी व सुमन दुबे को लेकर भारतीय उच्चायोग के कवि सम्मेलन के लिये प्रस्थान किया जहाँ श्री पदमेश गुप्ता के संचालन में हिन्दी दिवस मनाया गया कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया काफी सराहनीय कवि सम्मेलन रहा कवि सम्मेलन के बाद बी॰वीसी में दीपावली कवि गोष्ठी का रिकार्डिंग की गैइ दीपावाली के बाद overscas cengrses के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने गये जहाँ काव्य पाठ करने का सौभाग्य मिला व रात्रि श्री अनिल शर्मा के निवास पर आ गये ।</p>
<p>दिनांक &#8212; 28-08-2002</p>
<p>प्रातः श्री अरुण ठाकुर जो कि मंदिर के प्रधान है उनसे मिलना हुआ इसके बाद टयूब bauurleo द्वारा गजेन्द्र जी के साथ विम्ब्रेले से कैमरा खरीद कर सबसे पहले बेकर स्ट्रीट गए जहाँ मैडम तुस्साद का वैक्स म्युस्यिम देखने का सौभाग्य मिला जो कि बहुत ही आकर्षक है। रात्रि में सलमान भाई के निवास पर खिद्दमत इंटरनेशनल द्वारा एक मुशायरे व कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया था। सलमान भाई बहुत ही सरल व भावुक व्यक्ति है कवि गोष्ठी बहुत सफल रही वनवासी राम कविता को सब लोगो ने काफी पसन्द किया।</p>
<p>दिनांक &#8212; 29-08-2002</p>
<p>प्रातः भारत से श्री गजेन्द्र जी के पिता का निधन समाचार मिला दिन भर कहीं जाने का मन नही बना रात्रि में पदमेश गुप्ता, पंकज नागपाल व तान्या के साथ कैसिनो जाने का अवसर मिला जो कि लंदन में अलग तरह की दुनिया है रात्रि में अनिल जी के घर आकर विश्राम किया।</p>
<p>दिनांक &#8212; 30-08-2002</p>
<p>प्रातः घर से निकल कर पैरिस के वीसा के लिये अनिल जी के साथ फ्रैंच एमबेसी जाना हुआ जहाँ पैरिस का वीसा मीनु जी के प्रयास से सब कवियो को मिला फ्रैंच एमबेसी से श्री सक्सेना जी के साथ ब्रिज देखने को मिला जो कि पाँच सौ वर्ष पुराना है व लंदन की पहचान है ब्रिज देखने के बाद हम सब नेहरु सैन्टर पहुचें जहा श्री पदम तलवार ने कवियो का स्वागत रखा हुआ था श्रीमति दिव्या माथुर से भी मिलना हुआ नेहरु सैन्टर बहुत सुन्दर भवन है जो कि भारत का सांस्कृतिक केन्द्र है यहा साय को खिदमत इंटरनेशनल के श्री सलमान आसिफ के निर्देशण मे भगत सिंह के जीवन पर एक बहुत ही आकर्षक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था इस कार्यक्रम मे काव्य पाठ करने के लिये श्री सलमान भाइ ने कहा इस कार्यक्रम के बाद श्री पंकज नागपाल, श्रीमति तान्या, गजेन्द्र सोलंकी व श्री पदमेश गुप्ता के साथ लंदन की रात्रि दुनिया को मिला जिसका शब्दों मे वर्णन करना बहुत कठिन है</p>
<p>दिनांक &#8212; 31-08-2002</p>
<p>शनिवार यहा छुट्टी का दिन रहता है जन्माष्टमी महापर्व पर श्री राम मंदिर साउथ मे कृष्ण रुप सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन संस्कार भारती द्वारा किया गया था इस कार्यक्रम मे जाने से पहले श्री संजीव जी के घर पर दीदी माँ ॠतम्भरा के दर्शन हुऐ जो कि साउथ के भागवत कथा के लिये आये हुये थे बाद मे श्री वीरेंद्र सन्धु के घर जाने का सौभाग्य मिला जो कि भगत सिंह की भतीजी है और फिर उनके पास श्री नरेश भारतीय के स्वास्थ्य के जानकरी के लिये अस्पताल गये फिर परिवार के साथ संस्कार भारती के कार्यक्रम में श्रीराम मंदिर पहूँचे जहाँ 35 बच्चो ने का बहुत ही उतकृष्ट प्रदर्शन किया श्री नवकेश पाल श्रीमती शशी ने बहुत ही श्रम किया बच्चो को तैयार किया लगभग 250 लोग इस कार्यक्रम में उपस्थित थे निर्णायक का काम करने सौभाग्य मिला मंदिर में काव्य पाठ किया व गजेन्द्र जी व मेरा मंदिर के प्रधान श्री अरुण ठाकुर जी ने अभिनंदन भी किया ।</p>
<p>दिनांक – 01-09-2002</p>
<p>प्रातः अनिल जी के निवास पर नार्वे गये डा॰ सुनील जोगी का आगमन हुआ घर पर नाश्ता करने के बाद डा॰ दिवाकर व राखी तथा दिव्या के साथ सब कवि श्री निर्मल शर्मा के निवास पर कवि सम्मेलन के लिये गये जहाँ बहुत ही अच्छा कवि सम्मेलन रहा लगभग 5 घन्टे चलने वाले कवि सम्मेलन लगभग 70-80 लोग उपस्थित थे जिन्होने बहुत ही मन से काव्य पाठ सुना । पहले दौर का संचालन डा॰ सुनील जोगी ने किया व दूसरे दौर का संचालन मेरे हाथ किया रात्रि को 11-30 बजे अनिल जी के निवास पर आकर विश्राम किया ।</p>
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		<title>डा॰ वेन आल्फन हर्मन, (USA) का साक्षात्कार</title>
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		<pubDate>Tue, 25 Sep 2007 07:02:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Rajesh Chetan</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[चलते-चलते]]></category>

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		<description><![CDATA[
डा॰ वेन आल्फन हर्मन, टैक्सास विश्वविद्यालय, आस्टिन (USA) में विगत चार दशकों से हिन्दी का अध्ययन-अध्यापन कर रहे हैं। उन्होनें हिन्दी के क्रियापदों के अलावा हिन्दी की संरचना एवं साहित्य की विभिन्न विधाओं पर भी शोध कार्य किया है। पिछले दिनों अमरीकी राष्ट्रपति बुश द्वारा घोषित राष्ट्रीय सुरक्षा भाषा पहल (नेशनल सेक्यूरिटी लैंग्वेज इनीशिएटिव) कार्यक्रम [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img src="http://rajeshchetan.net/wordpress/chalte/files/2007/10/dscn0090.jpg" alt="dscn0090.jpg" /><img src="http://rajeshchetan.net/wordpress/chalte/files/2007/10/dscn0087.jpg" alt="dscn0087.jpg" /></p>
<p><strong>डा॰ वेन आल्फन हर्मन, टैक्सास विश्वविद्यालय, आस्टिन (USA) में विगत चार दशकों से हिन्दी का अध्ययन-अध्यापन कर रहे हैं। उन्होनें हिन्दी के क्रियापदों के अलावा हिन्दी की संरचना एवं साहित्य की विभिन्न विधाओं पर भी शोध कार्य किया है। पिछले दिनों अमरीकी राष्ट्रपति बुश द्वारा घोषित राष्ट्रीय सुरक्षा भाषा पहल (नेशनल सेक्यूरिटी लैंग्वेज इनीशिएटिव) कार्यक्रम हेतु हिन्दी-उर्दू भाषा के फ्लेगशिप कार्यक्रम के भी वे प्रभारी है। इसी सिलसिले में वे पिछले दिनों दिल्ली आए हुए थे। हिन्दी एवं मीडिया के अध्येता डा॰ जवाहर कर्नावट एवं कवि राजेश चेतन ने उनसे अमेरिका में हिन्दी शिक्षण और हिन्दी की वैश्वीक स्थिति पर लम्बी बातचीत की। बातचीत के प्रमुख अंश यहां प्रस्तुत हैं – </strong></p>
<p><strong>प्रश्न : </strong>आपने हिन्दी क्यों और कैसे सीखी ?</p>
<p><strong>उत्तर : </strong>अमेरिका में सभी लोग कोई-न-कोई विदेशी भाषा सीखते हैं। कक्षाओं में बड़ी उम्र में भी भाषा सीखी जाती है। हमारे लिए स्नातकोत्तर स्तर पर यह अनिवार्य था कि एक गैर यूरोपीय भाषा सीखें। संयोग से 40 वर्ष पूर्व मैंने हिन्दी को चुन लिया।</p>
<p><strong>प्रश्न : </strong>क्या वह समय अमेरिका में हिन्दी पढ़ने-पढ़ाने का शुरुआती दौर था ?</p>
<p><strong>उत्तर: </strong>सन् 1958 में रूसियों ने जब स्पुतनिक छोड़ा तो उसकी हलचल अमेरिका में भी हुई। विज्ञान और भाषा शिक्षा की ओर विशेष रूप से ध्यान दिया जाने लगा। सन् 1958 में यू॰ एस॰ ए॰ के कुछ चुने हुए विश्वविद्यालय में हिन्दी शिक्षण शुरू हुआ और पाठ्य पुस्तकें तैयार की। दरअसल उस समय प्रवासी भारतीयों की संख्या कम थी। विश्वविद्यालयों में बहुत सीमित कार्य था और छात्र भी कम थे।</p>
<p><strong>प्रश्न : </strong>आज अमेरिका में हिन्दी शिक्षण किस स्थिति तक पहुंच गया है ?</p>
<p><strong>उत्तर : </strong>अमेरिका में फिलहाल सरकारी स्तर पर हिन्दी की पढ़ाई केवल विश्वविद्यालय स्तर पर ही हो रही है अर्थात् हम शिक्षा में 13 वें से 16 वें वर्ष में हिन्दी पढ़ाते है, लेकिन उद्देश्य है कि हाई स्कूल में भी हिन्दी की शिक्षा दी जाए। ह्यूस्टन में इसकी शुरुआत हो चुकी है। निजी स्तर पर तो अनेक स्थानों पर हिन्दी की पढ़ाई हो ही रही है। भाषा शिक्षण संबंधी वेबसाइट पर देशवासी अपनी भाषा के शिक्षण की व्यवस्था के लिए वोट डाल सकते हैं। हायर सेकेंडरी स्तर पर हिन्दी पढ़ाने के लिए 10 लाख वोट डाले जा चुके हैं। हिन्दी, चीनी को तो अब व्यापार के लिए जरूरी माना जा रहा है। न्यूजर्सी में काफी भारतीय रहते हैं। वहां भी इसकी शुरुआत हो रही है। शनिवार-रविवार को हिन्दी की पढ़ाई अलग से होती है। आज यह दायरा काफी व्यापक हो गया है। ऐसे लोग जिनके माता-पिता भारत के हैं, उनका जुड़ाव भारतीय संस्कृति से होने के कारण भी वे हिन्दी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसी प्रकार पाकिस्तानी उर्दू की ओर बढ़ रहे हैं।</p>
<p><strong>प्रश्न : </strong>यह बात तो हुई भारतीय मूल के लोगों की किन्तु क्या अमेरिकन विद्यार्थी भी हिन्दी पढ़ने की ओर अग्रसर हो रहे हैं ?</p>
<p><strong>उत्तर : </strong>अमेरिकी छात्रों की संख्या कम है; किन्तु हम चाहते हैं कि उनका झुकाव इस ओर बढ़े। भाषा के फ्लेगशिप कार्यक्रम के माध्यम से उनका रूझान इस ओर बढ़ा भी है। इंजीनियरिंग, विज्ञान, चिकित्सा की शिक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ प्रतिदिन एक-एक घंटा हिन्दी/उर्दू पढ़ाने की व्यवस्था भी की गई है। यदि छात्र एंथ्रोपोलाजी पढ़ रहा है तो भी कुछ समय हिन्दी भी पढ़ेगा। इसमें उनकी मदद के लिए सहायक शिक्षक भी होंगे। शिक्षकों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। मैं भारत इसीलिए आया था – अध्यापकों के चयन के साथ ही नई पाठ्य सामग्री भी तैयार करना है।</p>
<p><strong>प्रश्न : </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति श्री बुश ने जिस राष्ट्रीय सुरक्षा भाषा पहल (नेशनल सेक्यूरिटी लैंग्वेज इनीशिएटिव) कार्यक्रम की शुरुआत की है, उसके माध्यम से हिन्दी शिक्षण किस प्रकार आगे बढ़ सकेगा ?</p>
<p><strong>उत्तर : </strong>यह एक बहुत बड़ा कार्यक्रम है जिसमें के॰ जी॰ से विश्वविद्यालय तक के विद्यार्थियों, यहां तक कि सरकारी कर्मचारियों में भी अरबी, चीनी, रशियन, हिन्दी, फारसी और अति आवश्यक भाषाएं (Critical Need Languages) जानने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो। मैंने जिस फ्लेगशिप कार्यक्रम का जिक्र किया था, वह पहले से अरबी, चीनी, कोरियन, रशियन आदि के लिए संचालित है। अब यह कार्यक्रम हिन्दी, उर्दू के लिए भी प्रारंभ किया गया है। इसके अलावा फुलब्राइट भाषा कार्यक्रम में हिन्दी विद्यार्थियों को भारत भेजा जाएगा और हिन्दी भाषा के शिक्षक अमेरिका आएंगे। यह आदान-प्रदान का कार्यक्रम 15-20 विद्यार्थियों से प्रारंभ होकर बढ़ता जाएगा। आप जानते ही होंगे कि अमेरिकन इंस्टिटयूट आफ इंडियन स्टडीज के अन्तर्गत जयपुर में हमारा केन्द्र अमेरिकी विद्यार्थियों को हिन्दी सिखाने के लिए पहले से ही कार्यरत है।</p>
<p><strong>प्रश्न : </strong>अमेरिका में हिन्दी शिक्षण की मुख्य बाधा क्या है ?</p>
<p><strong>उत्तर : </strong>हिन्दी प्रशिक्षण के लिए बहुत सी सामग्री तैयार करना है। अब हम मीडिया का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करना चाहते हैं। विद्यार्थी केवल पढ़े-लिखे ही नहीं सुने भी। टी॰ वी॰ पर भाषा शिक्षण से संबंधित अच्छे कार्यक्रम तैयार हो सकते हैं। भारत के सहयोग से यह कार्य भी हम करने जा रहे हैं। समस्या यह है कि भारत में भी हिन्दी माध्यम की शिक्षा अविकसित है। अविकसित से मेरा आशय उच्च शिक्षा में हिन्दी माध्यम नहीं है। इस कारण भी समस्याएं आती हैं।</p>
<p><strong>प्रश्न : </strong>अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी की क्या स्थिति है ?</p>
<p><strong>उत्तर : </strong>जब तक देश में यानी भारत में हिन्दी पूरी तरह स्वीकार नहीं होती तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कैसे स्थापित होगी। यहां लोग मजबूरी में अन्तर्राष्ट्रीय बनने की कोशिश करते हैं, जबकि दूसरे देशों में ऐसा नहीं है। बहुभाषिक देश होने के कारण भी समस्या है। अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा होने से भी विपरीत प्रभाव होता है; किन्तु यह स्थिति बदलेगी नहीं। संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को लाने की कोशिश हो रही है। किन्तु जब तक भारतीय प्रतिनिधि वहां हिन्दी में बोलेंगे ही नहीं तो यह कैसे संभव होगा। विश्व हिन्दी सम्मेलन न्यूयार्क में हो रहा है। अगर हिन्दी की स्थिति भारत में अच्छी होती तो विश्व हिन्दी सम्मेलन की जरूरत ही नहीं होती।</p>
<p>साभार<br />
<a href="http://pravasisansar.com">http://pravasisansar.com</a></p>
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		<title>शव्दों के जादूगर डा॰ बृजेन्द्र अवस्थी</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Apr 2007 11:56:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Rajesh Chetan</dc:creator>
		
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		<description><![CDATA[एक ओर देश की सेना कारगिल में शत्रुओं से जूझ रही थी तो दूसरी ओर देश की जनता वर्ल्ड कप क्रिकेट मे डूबी थी तिरंगे मे लिपट कर जवानो के शव आ रहे थे कि एक दिन कुछ मित्रों के साथ तत्कालीन उपप्रधान मंत्री व गृहमंत्री श्री लाल कृष्ण अडवाणी से मिलने का अवसर मिला। [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>एक ओर देश की सेना कारगिल में शत्रुओं से जूझ रही थी तो दूसरी ओर देश की जनता वर्ल्ड कप क्रिकेट मे डूबी थी तिरंगे मे लिपट कर जवानो के शव आ रहे थे कि एक दिन कुछ मित्रों के साथ तत्कालीन उपप्रधान मंत्री व गृहमंत्री श्री लाल कृष्ण अडवाणी से मिलने का अवसर मिला। अडवाणी जी के सुझाव पर जन जागृति हेतु &#8220;चुनौती है स्वीकार&#8221; शीर्षक से एक कवि सम्मेलन का आयोजन तय हुआ। डा॰ बृजेन्द्र अवस्थी की अध्यक्षता में श्री सोम ठाकुर, डा॰ गोविन्द व्यास, डा॰ कुँअर बेचैन, श्री हरिओम पंवार, श्री विनीत चौहान, श्री नरेश शांडिल्य व मुझे भी कविता पाठ का सौभाग्य मिला। इन्द्र देव की उस दिन अपार कृपा थी दिल्ली में सब तरफ पानी ही पानी दिखाई पड रहा था ऐसे मौसम मे दिल्ली के फिक्की सभागार में क्षमता से दूगने लोग उपस्थित देखकर आश्चर्य हुआ। अडवाणी जी ने उद्घाटन अवसर पर कहा युद्ध चल रहा है अतः कवियों से क्षमा चाहता हूँ कुछ समय ही आपके मध्य रहूँगा लेकिन कविता का जादू उपप्रधान मंत्री के सर चढने लगा और लगातार चार घंटे वे कवियों को सुनते रहे। समापन की बेला मे अध्यक्षीय काव्य पाठ के लिये डा॰ बृजेन्द्र अवस्थी की आशु काव्य धारा पर जन समुदाय उमड़ रहा था और फिर जैसे ही डा॰ अवस्थी ने शहीदों के सम्मान में कविता सुनाई जनता के साथ साथ देश के गृहमंत्री की आँखों में भी अश्रुधारा निकली जनता के मध्य बैठे श्री आडवाणी जी ने अपने स्थान पर खडे होकर डा॰ अवस्थी से कहा कि मुझे भी कुछ कहना है और फिर अडवाणी जी ने जो कहा उससे डा॰ बृजेन्द्र अवस्थी की शब्द शक्ति को समझा जा सकता है। गृहमंत्री ने कहा – डा॰ बृजेन्द्र अवस्थी जी मैं आपको आश्वासन देता हूँ कि चाहे जो हो एक इंच भूमि भी दुश्मन को नहीं जायेगी। ऐसे शब्द शिल्पी डा॰ बृजेन्द्र अवस्थी को श्रद्धांजलि।</p>
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		<title>विश्व पटल पर हिन्दी</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Apr 2007 11:54:45 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Rajesh Chetan</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[चलते-चलते]]></category>

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		<description><![CDATA[हिन्दी देववाणी संस्कृत की बेटी है । हमारी राष्ट्र भाषा, राज्य भाषा और हम सबकी अभिलाषा है । हिन्दी आजादी के आन्दोलन का गीत, साम्प्रदायिक सौहार्द का संगीत तथा भारत माँ की आरती है । हिन्दी के कारण ही हम सब भारतवासी भारती हैं, हिन्दी हैं, हिन्दुस्तानी हैं । भाषा किसी भी देश की आत्मा [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दी देववाणी संस्कृत की बेटी है । हमारी राष्ट्र भाषा, राज्य भाषा और हम सबकी अभिलाषा है । हिन्दी आजादी के आन्दोलन का गीत, साम्प्रदायिक सौहार्द का संगीत तथा भारत माँ की आरती है । हिन्दी के कारण ही हम सब भारतवासी भारती हैं, हिन्दी हैं, हिन्दुस्तानी हैं । भाषा किसी भी देश की आत्मा होती है क्यों की भाषा ही आम व्यक्ति की शक्ति है। भले ही आज भारत में अंग्रेजी का आभा मण्डल अत्यन्त प्रभावशाली लगता है परन्तु कोई भी ये बताये कि भारत ने आज तक अंग्रेजी का कोई प्रसिद्ध कवि या प्रसिद्ध लेखक दिया क्या ? संभव नही । क्यों की लेखन हो या कविता केवल आत्मा की भाषा मे ही संभव है ।</p>
<p>ये ठीक है कि आजादी के बाद राजनेताओं ने हिन्दी पर सदैव प्रहार किये हैं परन्तु ये ही नेता जब वोट के लिये जाते हैं तो हिन्दी में संवाद करते हैं । क्या भारत में स्वाधीनता दिवस के दिन लाल किले की प्राचीर से हिन्दी के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में सम्बोधन संभव लगता है । अहिन्दी भाषी सोनिया गाँधी हो या देवगोडा, ये जानते थे कि यदि भारत का नेतृत्व करना है तो हिन्दी सीखना अनिवार्य है ।</p>
<p>राजनीति ही नही अगर हम भारत के बाजार की तरफ देखते हैं तो वहाँ भी स्थिति कुछ अजीब दिखाई पडती है, नमक की थैली से लेकर हवाई जहाज तक पैकिंग होगी अंग्रेजी में परन्तु विज्ञापन के समय इन्ही कम्पनियों को हिन्दी का ही सहारा लेना पडता है । भारत में बाढ की तरह आने वाले अनेक अंग्रेजी चैनल रातों रात इस लिये बंद हो गये क्यों की उन्हे ना तो दृश्य मिले और ना ही विज्ञापन । लगभग ये ही स्थिति विश्व में सर्वाधिक लोकप्रिय हिन्दी सिनेमा उद्योग भी है । सिनेमा का हिन्दी के प्रचार में बहुत बडा योगदान है । विश्व के अनेक देशों में मैने स्वयं हिन्दी सिनेमा की लोकप्रियता को देखा है लेकिन व्यवहार में हिन्दी सिनेमा की प्रचार सामग्री से लेकर कलाकारों तक सारा वातावरण अंग्रेजीमय है ।</p>
<p>मित्रों इस स्थिति से घबराने की आवश्यकता नही है, कई बार हम भावुक होकर अंग्रेजी को कोसने लगते हैं । इसका दोष हम अंग्रेजी को नही दे सकते हैं । आज आवश्यकता है हम अपने अंदर झांके व अंग्रेजी की मानसिक गुलामी से अपने को मुक्त करें । मैने अपनी एक कविता में इस का उल्लेख इस तरह किया है –</p>
<p align="center">
&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8211;<br />
अंग्रेजों के पराधीन थे<br />
अपनों के आधीन हैं यानि<br />
हम स्वतन्त्र नहीं स्वाधीन हैं<br />
अंग्रेज़ी खाना<br />
अंग्रेज़ी पीना<br />
अंग्रेज़ी भाषा<br />
अंग्रेज़ी विचार<br />
अंग्रेज़ी मानसिकता<br />
कैसे कहें कि आ गई स्वतन्त्रता<br />
अंग्रेजियत को छोड़<br />
जिस दिन गूँजेगा हिन्दी का मन्त्र<br />
उस दिन हम होंगे स्वतन्त्र<br />
&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8211;<br />
आज विश्व में सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषाओं में हिन्दी का चीनी के बाद दूसरा स्थान है । विश्व के 195 से भी अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढाई जा रही है । विश्व में सर्वाधिक पत्र पत्रिकायें हिन्दी में प्रकाशित हो रही हैं । अमरीका के राष्ट्रपति जार्ज बुश अमरीका के विद्यालयों में हिन्दी लाने की घोषणा कर चुके हैं । आज विश्व ये जान गया है कि भारत की महान संस्कृति के विषय में जानना है तो हिन्दी को सीखना पडेगा । आज इस्कान के मंदिरों में विदेशी लोगों के मुख से संस्कृत के मंत्र सुनकर अच्छा लगता है ।</p>
<p>यहाँ विश्व के हिन्दी सेवियों के योगदान को भी भुलाया नही जा सकता है । अमरीका में हिन्दी यू एस ए संस्था के स्वयंसेवक श्री देवेन्द्र सिंह व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रचिता सिंह अमरीका के विद्यालयो में हिन्दी लाने को कृत संकल्प हैं । उनका अमरीका के विद्यालयों में हिन्दी लाने का हस्ताक्षर अभियान संभवतः अमरीका के इतिहास में सबसे बडा हस्ताक्षर अभियान है । श्री पदमेश गुप्ता यू॰के॰ हिन्दी समिति के माध्यम से हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन कर समस्त यूरोप में हिन्दी की पताका को लहरा रहे हैं । मैं पिछले दिनों अरब देश ओमान गया, वहाँ भी इंडियण स्कूल के अध्यापकों का हिन्दी के प्रति उत्साह देखकर अच्छा लगा । अरब देश के किसी हिन्दी कवि सम्मेलन मे 2000 लोगों की उपस्थिति देखकर हिन्दी की लोकप्रिय को समझा जा सकता है ।</p>
<p>आनेवाले समय ओर अधिक उत्साह वाला है क्यों की हमारी इस गुलाम मानसिकता के कारण कोटि कोटि जन की भाषा संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नही बन सकी परन्तु पहली बार भारत सरकार विश्व हिन्दी सम्मेलन न्यूयार्क में करने जा रही और मै कह सकता हूं ये विश्व हिन्दी सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र संघ के दरवाजे पर हिन्दी की अलख जगाने में सफल रहेगा ।</p>
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		<title>अमरीका मे हिन्दी के बढते कदम</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Apr 2007 11:52:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Rajesh Chetan</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[चलते-चलते]]></category>

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		<description><![CDATA[आज विश्व शक्ति का नाम ही अमरीका है । संयुक्त राष्ट्र संघ का कार्यालय भी अमरीका में है, भले ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने हिन्दी को अभी तक स्वीकार नहीं किया है परंतु विश्व शक्ति के आंगन में हिन्दी का छोटा पौधा फल-फूल रहा है । सबसे पहले स्वतंत्रता प्रतीक लिबर्टी प्रतिमा को प्रणाम करता [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>आज विश्व शक्ति का नाम ही अमरीका है । संयुक्त राष्ट्र संघ का कार्यालय भी अमरीका में है, भले ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने हिन्दी को अभी तक स्वीकार नहीं किया है परंतु विश्व शक्ति के आंगन में हिन्दी का छोटा पौधा फल-फूल रहा है । सबसे पहले स्वतंत्रता प्रतीक लिबर्टी प्रतिमा को प्रणाम करता हूँ जिसने यहाँ सभी धर्मो,जातियों और भाषाओं को विकसित होने का समान अवसर प्रदान किया है ।</p>
<p>अमरीका यात्रा के प्रथम पडाव में न्यू जर्सी के प्लेंसबोरो विद्यालय के हिन्दी प्रेमियों से खचाखच भरे सभागार को देखकर मुझे लगा कि वह दिन दूर नहीं जब अमरीका के विद्यालयों में हिन्दी एक भाषा के रूप में पढाई जाएगी । आज हिन्दी-यू.एस.ए. संस्था द्वारा अमरीका में बीस से अधिक हिन्दी विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है । इन विद्यालयों में साप्ताहिक छुट्टियों में बालक अपने अभिभावकों के साथ घंटों का सफर तय करके हिन्दी सीखने आते हैं । वर्ष के अंत में यह सभी बालक हिन्दी महोत्सव के रुप में आकर अपनी हिन्दी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, इस बार यह पंचम हिन्दी महोत्सव का आयोजन हिन्दी यू.एस.ए. ने किया था । प्रातः से ही छोटे-छोटे बालक अपने माता-पिता के साथ सभागार में जुटने लगे थे, लगभग एक हजार क्षमता का हाल कुछ ही देर में खचाखच भर गया और फिर प्राथर्ना के साथ पंचम हिन्दी महोत्सव आरम्भ हुआ। गिनती बोलें , वेष प्रतियोगिता , नाटक व कविता पाठ प्रतियोगिता, नृत्य, भाषण और भारत -दर्शन आदि दिन भर अनेक कार्यक्रम बालकों ने सफलतापूर्वक प्रस्तुत किए । लग रहा था कि सभागार में समस्त भारत उतर आया हो, प्राची और पार्थ ने कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया ।</p>
<p>धीरे-धीरे दिन ढलता गया और अब मंच पर भारत से आये कवि-कलाकारों को आमंत्रित किया गया । हास्य अभिनेता राजू श्रीवास्तव और विश्व प्रसिद्ध चित्रकार कवि बाबा सत्यनारायाण मौर्या के स्वागत में जन समूह उमड रहा था । राजू श्रीवास्तव की प्रस्तुति पर सभागार लगातार ठहाकों और तालियों से गूँज रहा था। राजू के अभिनय में बडी सहजता है, अमिताभ बच्चन को अपना आदर्श मानने वाले राजू जनता के दिलों पर अपनी अदाकारी के अमिट हस्ताक्षर करने में सफल रहे । बाबा सत्यनारायाण मौर्य हिन्दी यू.एस.ए.के एक सक्रिय कार्यकर्ता के रुप में वर्षों से जुडे हैं । अत: वे हिन्दी यू.एस.ए के स्वयंसेवकों में बहुत लोकप्रिय है । .राजू श्रीवास्तव और मेरे लम्बे काव्य पाठ के बाद रात्रि के लगभग साढे ग्यारह बजे का समय हो गया था लेकिन जनता अभी भी पूरे उत्साह से जमी हुई थी और फिर शुरू हुआ बाबा का लोकप्रिय कार्यक्रम भारत माता की आरती, कानवास पर बाबा के हाथ थिरक रहे थे, संगीत का आभाव था, मैं किसी तरह राजू के साथ मिलकर टूटे-फूटे स्वर में बाबा का सहयोग कर रहा था और देखते ही देखते सभागार में भारत मां की जय के नारे गूँजने लगे । हिन्दी को अमरीका में स्थापित करने के संक्लप के साथ पंचम् हिन्दी महोत्सव संपन्न हुआ । हिन्दी यू.एस.ए के संयोजक श्री देवेंद्र सिंह व उनकी धर्म पत्नी श्रीमती रचिता सिंह साधुवाद के पात्र हैं जिनके नेतृत्व में अनेक स्वयंसेवक जैसे श्रीमती और श्री संदीप अग्रवाल , श्री राज मित्तल , श्रीमती और श्री शैलेंद्र सिहं , श्री ब्रजेश सिहं , श्रीमती और श्री सचिन गर्ग , श्री दिग्विजय म्यूर , श्री त्रृषि गोर, श्रीमती और श्री दुर्गेश गुप्ता हिन्दी सेवा में जुटे हैं ।</p>
<p>यहाँ ओलंपिक सिटी अटलांटा का उल्लेख करना भी मैं जरूरी समझता हूँ , चालीस लाख की आबादी का यह शहर मौसम में दिल्ली जैसा है । यहाँ बडी संख्या में कंप्यूटर इंजिनीयर हैं । श्री शिव अग्रवाल जी द्वारा निर्मित इंडियन ग्लोबल माँल अटलांटा में एक छोटे भारत के रूप में है । सेवा इंटरनेशनल ने यहाँ के सभागार में हास्य के फव्वारे नाम से एक हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया । लखनऊ के एक युवा कवि श्री अभिनव शुक्ला जो कि आजकल अमरीका में ही हैं, उनके काव्य पाठ से कवि सम्मेलन आरंभ हुआ । अभिनव के चुटीले व्यंग्य बाण और आरक्षण पर प्रहार करती कविता ने जनता को प्रभावित किया । कार्यक्रम का संचालन करते हुए मुझे भी कुछ कविता प्रस्तुत करने का अवसर मिला और फिर आरंभ हुआ बाबा मौर्य द्वारा भारत माँ की आरती का कार्यक्रम । अटलांटा के कार्यकर्ताओं ने संगीत का प्रबंध कर लिया था, अतः बाबा मौर्य के गीतों व संगीत की धुनों के साथ पूरा सभागार भारत माँ की भक्ति में नाचने लगा । इस समारोह को सफल बनाने में श्रीमती और श्री गौरव सिहं एवम् श्रीमती और श्री श्रीकांत जी साधुवाद के पात्र हैं ।</p>
<p>हिन्दी के इस पताका को फहराने में अंतराष्ट्रीय हिन्दी समिति का भी बडा योगदान है । व्यक्तिगत बातचीत में श्री हिमांशु पाठक ने मुझे बताया कि अमरीका के पुस्तकालयों में आजकल हिब्रू , चीनी के साथ-साथ हिन्दी साहित्य पर भी परिचर्चा आयोजित की जा रही है । अब यह अवसर आया है कि भारत सरकार हिन्दी के इन समर्पित कार्यकर्ताओं को साथ लेकर विश्व हिन्दी सम्मेलन अमरीका में आयोजित करने पर विचार करे। अगर अगला विश्व हिन्दी सम्मेलन अमरीका में किया गया तो हिन्दी के इन छोटे-छोटे प्रकलपों को ऊर्जा मिलेगी और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वार पर हिन्दी की एक सश्कत आवाज भी पहुँच सकेगी ।<br />
अमरीका के हिन्दी सेवियों को शत-शत प्रणाम ।</p>
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		<title>हिन्दी का एक लघु दीप - ओमान</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Apr 2007 11:51:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Rajesh Chetan</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[चलते-चलते]]></category>

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		<description><![CDATA[मस्कट ओमान की राजधानी, सुंदर, सुसस्जित, एक ओर समन्दर,दूसरी ओर पहाड, शापिंग माल, होटल्स, 25 लाख की आबादी के ओमान देश की एक चौथाई जनसंख्या यहां निवास करती है । अगर आपको अंग्रेजी नही आती ना ही अरबी आती तो घबराना नहीं ओमान मे हिन्दी से भी आपका काम बखूबी चलेगा । दिल्ली से अहमदाबाद [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>मस्कट ओमान की राजधानी, सुंदर, सुसस्जित, एक ओर समन्दर,दूसरी ओर पहाड, शापिंग माल, होटल्स, 25 लाख की आबादी के ओमान देश की एक चौथाई जनसंख्या यहां निवास करती है । अगर आपको अंग्रेजी नही आती ना ही अरबी आती तो घबराना नहीं ओमान मे हिन्दी से भी आपका काम बखूबी चलेगा । दिल्ली से अहमदाबाद होते जैसे ही मस्कट पहुँचे इंडियन सोशल क्लब के श्री सी एम सरदार, श्री गजेश धारीवाल , श्री वीर सिंह और श्री एन डी भाटिया ने सपरिवार पुष्पगुच्छों से कवियों का गर्मजोशी से अभिनन्दन किया, ओमानी नागरिक विस्मय से इस समारोह को देख रहे थे । इस लघु समारोह के बाद हास्य आचार्य श्री ओम प्रकाश आदित्य के नेतृत्व में युवा कवियों के दल ने अलग अलग गाडियों में शहर के प्रतिष्ठित होटल रामी की ओर प्रस्थान किया ।</p>
<p>लूलू शापिंग माल में काउंटर संभाले ओमानी लडकियों की सक्रियता देख कर अच्छा लगा, सब तरफ भारतीय परिवेश, भारतीय लोग और हिन्दी, मानो ओमान में नहीं दिल्ली में ही घूम रहें हों । इंडियन स्कूल, मस्कट के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष श्री द्विवेदी ने बताया कि उनके विद्यालय में बालको में हिन्दी पढने का काफी उत्साह है लेकिन अभिभावक जन की हिन्दी उपेक्षा से वे परेशान दिखाई पडे । </p>
<p>ओमान के सुल्तान के निजी होटल अलबूस्तान का बडा हाल जिसकी क्षमता लगभग 1500 है समय से पूर्व ही खचाखच भर गया था कार्यक्रम के संयोजक सरदार साहब ने बडे चुटीले अंदाज में कवि सम्मेलन के स्वागत सत्र का संचालन करते हुये बताया कवि सम्मेलन को ले कर लोगों में सर्वाधिक उत्साह है, श्रोताओं में केवल भारतीय ही नहीं अपितु ओमानी, पाकिस्तानी व बंगलादेशी भी होते है और फिर शुरु हुआ डा सुनील जोगी के सधे हुये संचालन में कवि सम्मेलन, एक ओर जहॉ लखनऊ के सर्वेश अस्थाना ने अपने सांसद व पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी पर तीखे व्यंग्य बाण छोडे दूसरी ओर राजस्थान के संजय झाला ने सोनिया जी को निशाना बनाया, राजेश चेतन की कविता अमरीका के व्हाईट हाऊस पे तिरंगा को भी लोगों ने पसन्द किया, प्रवीण शुक्ल की भूकम्प त्रासदी कविता के साथ ही हंसी ठहाकों के बीच पहले दौर का कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ।</p>
<p>ठहाकों के बीच दूसरा दौर महेन्द्र अजनबी ने आरम्भ किया, जहां उन्होनें भूत वाली कविता के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं पर तीखा प्रहार किया, वही शायर तह्सीन मुनवर ने शहनाई सम्राट बिसमिल्लाह को याद किया । सुनील जोगी की पत्नी सौन्दर्य कविता पर लोग झूम रहे थे और समापन में आदित्य जी की माडर्न शादी कविता का भी लोगों ने भरपूर आनन्द लिया ।</p>
<p>इंडियन सोशल क्लब, इंडियन स्कूल, भारत के कवि, भारत सरकार और भारत के हिन्दी संगठन यदि मिलकर कार्य करें इस छोटे से देश में हिन्दी का बडा काम हो सकता है । ओमान के हिन्दी प्रेमियों को साधुवाद्।</p>
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		<title>अग्रवाल समाज का रोल माडल पानीपत</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Apr 2007 11:50:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Rajesh Chetan</dc:creator>
		
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		<description><![CDATA[पानीपत का इतिहासिक किला, किले पर आकर्षक अग्रसेन वाटिका, वाटिका के भव्य मंच पर 18 बर्ष पूर्ण होने पर युवा अग्रवाल क्लब का स्मारिका लोकार्पण उत्सव, संगीत की धुनें, पुष्प बर्षा, शंखनाद, सुसज्जित दीप मालिका, वन्दन गीत, आरती, नृत्य कविता पाठ, समाज के बुजुर्गों का सम्मान, समाज के बालकों द्वारा आकर्षक कार्यक्रम, खचाखच भरा पंडाल, [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>पानीपत का इतिहासिक किला, किले पर आकर्षक अग्रसेन वाटिका, वाटिका के भव्य मंच पर 18 बर्ष पूर्ण होने पर युवा अग्रवाल क्लब का स्मारिका लोकार्पण उत्सव, संगीत की धुनें, पुष्प बर्षा, शंखनाद, सुसज्जित दीप मालिका, वन्दन गीत, आरती, नृत्य कविता पाठ, समाज के बुजुर्गों का सम्मान, समाज के बालकों द्वारा आकर्षक कार्यक्रम, खचाखच भरा पंडाल, उत्साहित महिलायें, अनुशासित बालक, उर्जा से भरे युवक, इस विशिष्ट आयोजन का कुशलता पूर्वक संचालन करते श्री राकेश मितल और समारोह के बाद उतम भोजन व्यवस्था । अग्रवाल समाज का ये दिव्य रुप अपने जीवन में पहली बार देखा।</p>
<p>एक दूसरा चित्र मंहगा निमन्त्रण पत्र, भाषा अशुद्ध, निमन्त्रण पत्र में दो दर्जन अतिथि और पचास आयोजकों के नाम, नेताओं की भीड, अतिथियों से भरा मंच, पंडाल खाली, इका दुका महिलायें, लम्बा स्वागत समारोह, अतिथियों का लगातार समारोह के बीच आना जाना, राजनीतिक भाषण, भोजन के लिये लम्बी कतार, ये दृश्य समाज के आयोजनों में बहुधा दिखाई पडता है ।</p>
<p>अग्रवाल समाज भारत का एक विशिष्ट समाज है, सांस्कृतिक व धार्मिक क्षेत्र में अग्रणी है, आज आवश्यकता है पानीपत की संगठन व्यवस्था को समझ कर उसके अनुसार चलने का प्रयास करें । पानीपत के कार्यकर्ताओं को बधाई।</p>
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		<title>मंत्रों के रचनाकार</title>
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		<pubDate>Sat, 21 Apr 2007 11:49:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Rajesh Chetan</dc:creator>
		
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		<description><![CDATA[हंसते खिलते फूलों को ही जग की आंखो का प्यार मिला
अंधियारे में जलने वाले हर दीपक को सत्कार मिला
जो अपने से बाहर आया उसको सारा संसार मिला
जिसने मरना सीखा उसको ही जीने का अधिकार मिला
बचपन में ही डा. कुंअर बेचैन की उपरोक्त पंक्तियों ने मुझे प्रभावित किया, आरम्भ से ही अपने शहर भिवानी के कवि [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>हंसते खिलते फूलों को ही जग की आंखो का प्यार मिला<br />
अंधियारे में जलने वाले हर दीपक को सत्कार मिला<br />
जो अपने से बाहर आया उसको सारा संसार मिला<br />
जिसने मरना सीखा उसको ही जीने का अधिकार मिला</p>
<p>बचपन में ही डा. कुंअर बेचैन की उपरोक्त पंक्तियों ने मुझे प्रभावित किया, आरम्भ से ही अपने शहर भिवानी के कवि सम्मेलनों में मुझे उनको सुनने का सौभाग्य मिला । स्कूल कालेज की कविता प्रतियोगिताओं मे उनके गीतों को प्रस्तुत करने का भी अवसर मिला लेकिन उनके साथ मंच पर कविता पढने व लम्बी काव्य यात्रायें करने का अवसर मिलेगा, ये तो मैने सपनें मे भी नहीं सोचा था ।</p>
<p>मुझे याद आता है दिल्ली में दीवाली मेले का वह कवि सम्मेलन, झूलों व माइक के शोर के कारण सभी कवि परेशान थे, डाक्टर साहब समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे और मैं संचालन दायित्व के लिये संघर्ष कर रहा था, जब पहले दो कवि अव्यवस्था की भेंट चढ गये तो क्रोध में आयोजकों के लिये मैने कुछ कठोर शब्दों का प्रयोग किया तो डाक्टर साहब ने मुझे अपने पास बुलाकर कहा हंसते खिलते फूलों को ही…, कविता जो सुनता है सुनाओ नहीं तो उपस्थिति लगाओ और चलो, मुझे इक मंत्र मिल गया और हम सब ने हंसते हंसते कार्यक्रम सम्पन्न किया ।</p>
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