Posted in छन्द on Jul 25th, 2007 No Comments »
गोकुल में गोपाल बरसाने नन्दलाल
वृन्दावन में तो आप रास बिहारी हैं
ग्वालों संग वन वन गाय को चराने वाले
प्रभु दीनानाथ मेरे आप बनवारी हैं
कंस पूतना का वध काली सिर नृत्य किया
लीलायें रचाने वाले आप लीलाधारी हैं
महाभारत का युद्ध भूमि हुई लाल लाल
जन जन बोल उठा आप अवतारी हैं
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Posted in छन्द on Jul 24th, 2007 No Comments »
कान्हा तेरी बांसुरी ने किया है कमाल ऐसा
झूमते हैं नर नार झूमती है गैया
गोप-गोपियों के संग नाचत है लाल जब
मात यशोदा भी लेत उनकी बलैया
घर घर घूम घूम माखन चुराने वाला
बोल रहा है चोरी नही की है मेरी मैया
सारा ब्रज मण्डल भी झूम झूम बोलता है
धन धन धन धन दाऊ जी के भैया
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Posted in छन्द on Jul 23rd, 2007 No Comments »
जेल में जन्म लिया ताले सब खुल गये
द्वारपाल निद्रा विलाप करने लगे
बारिश तूफान वेग बढता ही जा रहा था
पानी में उतर वासुदेव डरने लगे
पांव छू के जमना ने रास्ता बनाया और
शेषनाग छाता बन साथ चलने लगे
नन्द के महल लाल छोड वासुदेव गये
यशोदा की गोद में हरि मचलने लगे
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Posted in छन्द on Jul 5th, 2007 No Comments »
बापू तेरे कारण ही भारत गरीब आज
दरिद्र नारायण की पूजा नहीं करते
पूजा के प्रभाव में ही भारत पिछड़ गया
क्योंकि खुशहाली से है लोग बड़ा डरते
चरखा चलाने से ना कोई धनवान हुआ
पेट ही तो भर पाता भूखे नहीं मरते
ये अमीर देश और जनता गरीब बापू
लोगों में कंगाली का भाव नहीं भरते
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