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Archive for July, 2007

गोकुल में गोपाल बरसाने नन्दलाल
वृन्दावन में तो आप रास बिहारी हैं
ग्वालों संग वन वन गाय को चराने वाले
प्रभु दीनानाथ मेरे आप बनवारी हैं
कंस पूतना का वध काली सिर नृत्य किया
लीलायें रचाने वाले आप लीलाधारी हैं
महाभारत का युद्ध भूमि हुई लाल लाल
जन जन बोल उठा आप अवतारी हैं

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कृष्णा

कान्हा तेरी बांसुरी ने किया है कमाल ऐसा
झूमते हैं नर नार झूमती है गैया
गोप-गोपियों के संग नाचत है लाल जब
मात यशोदा भी लेत उनकी बलैया
घर घर घूम घूम माखन चुराने वाला
बोल रहा है चोरी नही की है मेरी मैया
सारा ब्रज मण्डल भी झूम झूम बोलता है
धन धन धन धन दाऊ जी के भैया

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जेल में जन्म लिया ताले सब खुल गये
द्वारपाल निद्रा विलाप करने लगे
बारिश तूफान वेग बढता ही जा रहा था
पानी में उतर वासुदेव डरने लगे
पांव छू के जमना ने रास्ता बनाया और
शेषनाग छाता बन साथ चलने लगे
नन्द के महल लाल छोड वासुदेव गये
यशोदा की गोद में हरि मचलने लगे

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बापू तेरे कारण ही भारत गरीब आज
दरिद्र नारायण की पूजा नहीं करते
पूजा के प्रभाव में ही भारत पिछड़ गया
क्योंकि खुशहाली से है लोग बड़ा डरते
चरखा चलाने से ना कोई धनवान हुआ
पेट ही तो भर पाता भूखे नहीं मरते
ये अमीर देश और जनता गरीब बापू
लोगों में कंगाली का भाव नहीं भरते

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