महाप्रज्ञ
Posted in छन्द on Feb 4th, 2008 No Comments »
पांव पांव चल चल सत्य का उजाला किया
गांव गांव गली गली शांति यज्ञ हो गये
प्राकृत और पाली वाले ग्रन्थों का संधान कर
बाल सन्त तेजोमयी स्वयं विज्ञ हो गये
प्रेक्षाध्यान विधि नव जीवन विज्ञान रचा
साधक सान्निध्य पा के सर्वज्ञ हो गये
गुरुवर तुलसी का मिला आशीष दिव्य
मुनिवर नथमल महाप्रज्ञ हो गये