खारा खारा
Posted in छन्द on Jul 14th, 2008 No Comments »
कृष्ण की बंसुरिया पे नर नार झुमते थे
नन्द जी का बेटा सबका दुलारा हो गया
घर छोड़ पति छोड़ और सन्तान छोड़
गोपियों का रोम रोम श्याम प्यारा हो गया
लोकलाज छोड़ कर श्याम संग रास किया
गोकुल का लाल सबका सहारा हो गया
कृष्ण के विरह में गोपियों के आसुंओ से
ब्रजभूमि सारा जल खारा खारा हो गया