Posted in दोहे on Apr 21st, 2007 No Comments »
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परिणय दिवस शुभ आपका, पावन परम पुनीत
अभिनन्दन में हम लिखें, मेहंदी वाले गीत
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नव ऊर्जा नव योजना, नव नूतन श्रृंगार
मंगलमय शुभकामना, कर लीजै स्वीकार
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हत्यारों की लाश को, ले जा अपने देश
पाक सैनिक यह सभी, आतंकी था देश
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मियां मुशरर्फ बजा रहे, विश्व शांति का ढोल
अडवानी ने खोल दी, उनकी सारी पोल
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गोंविद-गोंविद भज रहे, गोंविद है नाराज
झंडेवाला ने […]
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अंग्रेजी पतझड़ गया, हिन्दी सावन आज
अब तो अपने देश में, हो हिन्दी का राज
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सोने की चिड़िया रहा, अपना भारत देश
सोना दुश्मन ले गया, चिड़िया रह गयी शेष
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कर्म भाग्य दोनों बड़े, इससे बढ़कर कौन
कर्म लग्न से कीजिए, भाग्य रहे ना मौन
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मच्छर अपने गांव में, खटमल अपनी खाट
कंगाली है जेब में, फिर भी अपनी ठाट
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अपने-अपने प्रेम का, […]
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त्याग शांति सुख सम्पदा, रंगों की पहचान
राष्ट्र पताका में छिपी, भारत भू की शान
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सदा दिवाली संत घर, कभी ना होता द्वन्द
दीप पर्व हो नित नया, आठो पहर आनंद
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समय चक्र से तेज है, जनसंख्या रफ्तार
कैसा होगा साथियों, भारत का उद्धार
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संसाधन सीमित सभी, युवा फिरे बेकार
नई सदी की दौड़ में, हार रही सरकार
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आओ यह संकल्प ले सीमित […]
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दातून नाही दीखती, मंजन है लाचार
टूथपेस्ट बिकने लगा, गली-गली बाजार
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आयुर्वेद को छोड़कर, अंग्रेजी उपचार
आयु छोटी हो गई, खर्चा कई हजार
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लाठी जिसके हाथ है, भैंस उसी के संग
बासमति पर चढ़ गया, अमरीका का रंग
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अस्पताल उद्योग हैं, स्कूलों की भरमार
इससे अच्छा और क्या, दुनिया में व्यापार
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अल्पाहार अंडा हुआ, भोजन मांसाहार
पशु पक्षी भयभीत हैं, कैसा अत्याचार
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मंदिरा ना ही […]
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