दोहे-1
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
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दातून नाही दीखती, मंजन है लाचार
टूथपेस्ट बिकने लगा, गली-गली बाजार
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आयुर्वेद को छोड़कर, अंग्रेजी उपचार
आयु छोटी हो गई, खर्चा कई हजार
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लाठी जिसके हाथ है, भैंस उसी के संग
बासमति पर चढ़ गया, अमरीका का रंग
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अस्पताल उद्योग हैं, स्कूलों की भरमार
इससे अच्छा और क्या, दुनिया में व्यापार
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अल्पाहार अंडा हुआ, भोजन मांसाहार
पशु पक्षी भयभीत हैं, कैसा अत्याचार
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मंदिरा ना ही सोमरस, ये कष्टो की ख़ान
बोतल छोटी है मगर, ले लेती है जान
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गुड़ियों जैसा हो गया, नारी का सम्मान
अग्नि परीक्षा ले रहे, कलयुग के भगवान
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