दोहे-3
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
अंग्रेजी पतझड़ गया, हिन्दी सावन आज
अब तो अपने देश में, हो हिन्दी का राज
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सोने की चिड़िया रहा, अपना भारत देश
सोना दुश्मन ले गया, चिड़िया रह गयी शेष
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कर्म भाग्य दोनों बड़े, इससे बढ़कर कौन
कर्म लग्न से कीजिए, भाग्य रहे ना मौन
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मच्छर अपने गांव में, खटमल अपनी खाट
कंगाली है जेब में, फिर भी अपनी ठाट
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अपने-अपने प्रेम का, अपना-अपना रोग
कहीं किसी का योग है, कहीं किसी का योग
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महालक्ष्मी जी दीजिए, निर्धन को वरदान
रोटी हो सम्मान की, सिर पर एक मकान
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हत्यारों से प्यार है, तुमसे कैसी बात
आतंकी का धर्म है, क्या मजहब क्या जात
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बुश के सम्मुख कर रहे, मियां मुशरर्फ डांस
हमसे गद्दारी करे, उनसे है रोमांस
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