Jul 14th, 2008 by Rajesh Chetan
डालर कि दोड़ में ये लीन हो गई
अमरीका में नारी अब मशीन हो गई
आफिस में काम और घर में भी काम
काम करते करते प्रवीण हो गई
घर दफ़्तर और कार भी चलाती है
लगता ये एक में ही तीन हो गई
पश्चिम में तन और भारत में मन
देखो बिन जल की ये मीन हो गई
घर को पहुंचने में देर हुई जब
बिन बात के ही छानबीन हो गई
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Jan 29th, 2008 by Rajesh Chetan
कैसा अजब नज़ारा है
हर घाटी अंगारा है
गली गली ख़ूनी जिसकी
वो कश्मीर हमारा है
किसको समझें हम अपना,
अपनों ने ही मारा है
छोड़ो बातें मौसम की,
हर मौसम हत्यारा है
माँ की आँखों में आँसू,
बेटा जो आवारा है
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Jan 29th, 2008 by Rajesh Chetan
घर को आग लगाते हो
और नहीं शर्माते हो
ये हड़तालें, आगजनी
ग़लत राह क्यों जाते हो
भूखा है मज़दूर अगर
क्या उद्योग चलाते हो
कर बिजली, पानी चोरी
अपने महल बनाते हो
अधिकारों की ही चिंता
अच्छा फ़्रर्ज़ निभाते हो
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Jan 29th, 2008 by Rajesh Chetan
बोस सभी से न्यारा था
नेता वही हमारा था
ख़ून के बदले आज़ादी
नेताजी का नारा था
गोरे दिल्ली से भागे
उसने जब ललकारा था
सौ करोड़ हम नतमस्तक
प्राणों से भी प्यारा था
नील गगन में चमक रहा
भारत का ध्रुवतारा था
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Jun 16th, 2007 by Rajesh Chetan
जन्म दिवस पर अभिनन्दन
जीवन हो चन्दन चन्दन
हम ऐसे ही काम करें
लोग करे शत-शत वन्दन
पल-पल ऐसे भाव रहें
महक उठे मन का आँगन
देश प्रेम सबसे बढ़कर
अर्पित इस पर तन मन धन
सबको खुशियाँ बाँट सकें
ऐसा हो अपना जीवन
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Jun 12th, 2007 by Rajesh Chetan
थे ज्ञानी विज्ञानी ओशो
ज्यूं कबीर की बानी ओशो
इस पथराई मानवता में
आये बनकर पानी ओशो
जिसने भी आँखों में झांका
उसकी बने कहानी ओशो
गीता वेद पुराण उपनिषद
गाते फिरे जुबानी ओशो
समझौतों की राह न पकड़ी
निकले स्वाभिमानी ओशो
उनका सानी कोई नहीं था
थे अपने ही सानी ओशो
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Jun 10th, 2007 by Rajesh Chetan
देव धरा हरिद्वार हमारी गंगा मां
करती भव से पार हमारी गंगा मां
सदियों से जो संस्कारों को सींच रही
कल कल अमृत धार हमारी गंगा मां
युग युग से हर भारतवासी पूज रहा
संस्कृति का आधार हमारी गंगा मां
भागिरथ की पुण्य साधना सफल हुई
मिला देव उपहार हमारी गंगा मां
दीप आरती शंखनाद संध्या वन्दन
दिव्य-मोक्ष का द्वार हमारी गंगा मां
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Jun 1st, 2007 by Rajesh Chetan
काली माँ वरदान हमारा कलकत्ता
माँ गंगा का गान हमारा कलकत्ता
परमहंस श्री रामकृष्ण की जय बोलो
जिनकी ऊँची शान हमारा कलकत्ता
खून के बदले आजादी देने वाला
नेता हुआ महान हमारा कलकत्ता
विश्व विजयी थे संत विवेकानन्द यहाँ
बढा धर्म का मान हमारा कलकत्ता
तीन दशक से लाल बुझक्कड़ ऐठे हैं
है उनकी दुकान हमारी कलकत्ता
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May 29th, 2007 by Rajesh Chetan
शरद ॠतु का आगमन दीपावली
दीपकों का प्रज्ज्वलन दीपावली
सत्य का डंका बजाया राम ने
झूठ का लंका दहन दीपावली
ॠषि दयानन्द ने दिखाया रास्ता
है तमस का आचमन दीपावाली
ज्ञान केवल मिल गया महावीर को
ज्ञान का शत-शत नमन दीपावली
हम शहीदों की करें वन्दना
देशहित पावन हवन दीपावली
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May 25th, 2007 by Rajesh Chetan
पेड़ों का पत्तों का फूलो का गान है
झरनों की कल कल में मीठी सी तान है
मेघों की गर्जन है बादल है बिजली है
कुदरत का देखो ये कैसा वरदान है
सुंदर से चेहरे है चेहरों पे लाली है
लाली में झांके भोली मुस्कान है
चोटी है घाटी है पावन सी माटी है
माटी में सोना है सोने में जान है
रंगों का मेला है उत्सव की बेला है
मेघों की नगरी है भारत की शान है
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
नाग पंचमी का त्योहार
मिर्जा खूब निभाया यार
जिस थाली में दूध पीया
उसको लेकर हो गये पार
घूर रहे केसर घाटी
भूल गये करगिल की मार
ताजमहल नापाक किया
तुम निकले पक्के मक्कार
अगली नाग पंचमी का
आमंत्रण कर लो स्वीकार
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
बुन्देलों की रानी थी
हार कभी ना मानी थी
घोडे पर तलवार लिये
रानी क्या मर्दानी थी
कांप उठे गोरे जिससे
झांसी की दीवानी थी
परदेशी छोडें भारत
उसने मन मे ठानी थी
साथ सिन्धिया देता तो
आजादी मिल जानी थी
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
रुप रंग में जो खोता है
प्रेम नही वह लव होता है
पश्चिम वाले क्या जाने
प्रेम का मतलब क्या होता है
प्रेम हृदय का मिलन है प्यारे
लव वाला काया ढोता है
प्रेम भला क्या छुप सकता है
प्रेमी ऑंखो से रोता है
वे क्या जाने प्रेम डगर को
जो केवल कांटे बोता है
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
कुरुक्षेत्र की भूमि वाला हरियाणा
सीधा साधा भोला भाला हरियाणा
मातृभूमि की बलिवेदी पर वीरों ने
अर्पित की मुण्डों की माला हरियाणा
पंडित लख्मी गूंज रहे हैं कण कण में
काव्य सुधा का छलके प्याला हरियाणा
धर्मक्षेत्र यह कुरुक्षेत्र यह जन जन का
श्रमशक्ति का पुण्य शिवाला हरियाणा
हर पार्क मे ताऊ देवी लाल खडे
राजनीति की गडबडझाला हरियाणा
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
भारत भू के कष्ट मिटाओ श्रीगणेश
आंतकवाद को दूर भगाओ श्रीगणेश
मल्टीनेशन हमको आकर लूट रही
स्वदेशी को फिर से लाओ श्रीगणेश
पिज्जा, बर्गर, सेण्डविच बिकता भारत में
लडडू का फिर भोग लगाओ श्रीगणेश
नेता अफसर भ्रष्टाचार में डूबे हैं
सदाचार का पाठ पढाओ श्रीगणेश
बच्चा बच्चा अब तनाव से पीडित है
सबको आकर खूब हंसाओ श्रीगणेश
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
पाने को तूं सब कुछ पा
‘औ’ परदेशी घर तो आ
डालर बेशक कुछ भी है
अम्मा आखिर है अम्मा
पिज्जा बर्गर मे खोया
अपने घर की रोटी खा
पनघट तुझको खोज रहा
आकर अपनी प्यास बुझा
गाँव की मिटी लाया हूँ
अपने संग मे लेता जा
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
तूफानों का दौर हमारे आंगन में
घटा घिरी घनघोर हमारे आंगन में
लील गया भूकम्प हजारो लोगो को
नाश हुआ चहुंओर हमारे आंगन में
सत्ता की गलियों में घायल ईमां है
घुस आये है चोर हमारे आंगन में
बुद्व महात्मा हम हैं तेरे अपराधी
हुआ धर्म कमजोर हमारे आंगन में
राष्ट्रधर्म औ संस्कृति का सम्मान करे
नव संवत की भोर हमारे आंगन में
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
नव संवत और नव उंमग
चहुं ओर उड रहा आज रंग
आतंकवाद से सभी तंग
दुनिया का बदलें रंग ढंग
समाप्त करे जेहाद जंग
संकल्प जगे कुछ अंतरंग
नव खुशियाँ और नवतरंग
इस साल उडे कुछ यूं पंतग
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
सर्दियों की कंपकपी का अन्त है
दर पे दस्तक दे रहा बसन्त है
फूल केसर का हवा में झूमता
पीत वस्त्रों में सजा ज्यूं सन्त है
काम कोई कैसे बिगड़े इस घडी
दे रहा आशीष जब इकदंत है
देखिये कुदरत की रंगत देखिये
गंध कैसी छाई दिगदिगन्त है
प्यार का खुला निमत्रंण है तुम्हे
प्रेम की भाषा सखी अनन्त है
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
नंदी पर सवार भोले शिव शंकर
भूतों के हैं यार भोले शिव शंकर
अर्ध्दनारीश्वर रूप सुहाना लगता है
गौरा से हैं प्यार भोले शिव शंकर
जटाजूट भभूत लपेटे काया है
गल सांपो का हार भोले शिव शंकर
कल्याण धरा का करने ही तो ले आये
सिर गंगा की धार भोले शिव शंकर
भारत के कण-कण पर शंकर नाम लिखा
करो राष्ट्र उद्धार भोले शिव शंकर
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
गांधी का उजला गुजरात
जीने की ज्वाला गुजरात
भूकम्पों को सहने में
पहला है पहला गुजरात
गरबा करता थिरक रहा
सुंदर सी बाला गुजरात
कुछ अखबारों के कारण
दुनिया में काला गुजरात
जिसने भारत को जोडा
वो पटेल वाला गुजरात
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
हरा हरा उत्तर प्रदेश
खरा खरा उत्तर प्रदेश
बाहुबलियों के कारण
डरा डरा उत्तर प्रदेश
बहना की माया देखो
चरा चरा उत्तर प्रदेश
मंदिर वालो ने समझा
भरा भरा उत्तर प्रदेश
नेता जी और अमर सिंह
मरा मरा उत्तर प्रदेश
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
राम अगर घर आएं दीवाली होती है
सब जब दीप जलाएं दीवाली होती है
मिलजुल कर सब प्रेम-प्यार से साथ रहें
चेहरे जब मुस्काएं दीवाली होती है
राम जी का नाम लेना तो अच्छा है
काम अगर अपनाएं दीवाली होती है
केवट से जब राम मिले तो ये बोले
वनवासी मिल जाएं दीवाली होती है
छप्पर वाले कोटि-कोटि जननायक का
मन्दिर भव्य बनाएं दीवाली होती है
दिल्ली के आसन पर चिंतित मोहन जी
मैडम जब मुस्काएं दीवाली होती है
लाल बुझक्कड़ सत्तामद में ऐंठे हैं
बिन कुर्सी इतराएं दीवाली होती है
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
तूफानों का दौर हमारे आंगन में
घटा घिरी घनघोर हमारे आंगन में
लील गया भूकम्प हजारों लोगों को
नाश हुआ चहुंओर हमारे आंगन में
सत्ता की गलियों में घायल ईमां है
घुस आये हैं चोर हमारे आंगन में
शंकराचार्यो को अपराधी कहते हैं
हुआ धर्म कमजोर हमारे आंगन में
राष्ट्रधर्म औ संस्कृति का सम्मान करें
नये वर्ष की भोर हमारे आंगन मे
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
केशव जी को प्यारे माधव
गुरूजी आप हमारे माधव
भारत भू के नील गगन में
चम-चम करते तारे माधव
अग्नि परीक्षाओं से निकले
कभी नही थे हारे माधव
संघ शक्ति का मंत्र फूंकते
राष्ट्र रथी रखवारे माधव
जन्मशती की बेला पावन
गूंज रहे तव नारे माधव
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
जब तक कोई बात ना हो
रिश्तों की शुरूआत ना हो
प्यार नही कुछ ओर है वो
जब तक दिल का साथ ना हो
वो जीवन भी क्या जीवन
जिसमें शह और मात ना हो
क्या कोई दिन ऐसा है
जिसकी कोई रात ना हो
रिश्ते जिन्दा रहते है
यदि भीतर से घात ना हो
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
मचा हुआ हुडदंग साथियों होली में
नेता हैं बदरंग साथियो होली में
दुनिया का दादा अमरीका होता है
मोदी जी से तंग साथियो होली में
पाकिस्तानी मियां मुर्शरफ नाच रहे
लगते पूरे नंग साथियो होली में
आतंकवादियों ने घायल नेपाल किया
माओवादी जंग साथियो होली में
युध्द नही अब क्रिकेट से ये लगता है
पाक हमारे संग साथियो होली में
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