महात्मा बुद्व
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
तूफानों का दौर हमारे आंगन में
घटा घिरी घनघोर हमारे आंगन में
लील गया भूकम्प हजारो लोगो को
नाश हुआ चहुंओर हमारे आंगन में
सत्ता की गलियों में घायल ईमां है
घुस आये है चोर हमारे आंगन में
बुद्व महात्मा हम हैं तेरे अपराधी
हुआ धर्म कमजोर हमारे आंगन में
राष्ट्रधर्म औ संस्कृति का सम्मान करे
नव संवत की भोर हमारे आंगन में