लक्ष्मी बाई
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
बुन्देलों की रानी थी
हार कभी ना मानी थी
घोडे पर तलवार लिये
रानी क्या मर्दानी थी
कांप उठे गोरे जिससे
झांसी की दीवानी थी
परदेशी छोडें भारत
उसने मन मे ठानी थी
साथ सिन्धिया देता तो
आजादी मिल जानी थी
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Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
बुन्देलों की रानी थी
हार कभी ना मानी थी
घोडे पर तलवार लिये
रानी क्या मर्दानी थी
कांप उठे गोरे जिससे
झांसी की दीवानी थी
परदेशी छोडें भारत
उसने मन मे ठानी थी
साथ सिन्धिया देता तो
आजादी मिल जानी थी