Posted in ग़ज़ल on May 29th, 2007 No Comments »
शरद ॠतु का आगमन दीपावली
दीपकों का प्रज्ज्वलन दीपावली
सत्य का डंका बजाया राम ने
झूठ का लंका दहन दीपावली
ॠषि दयानन्द ने दिखाया रास्ता
है तमस का आचमन दीपावाली
ज्ञान केवल मिल गया महावीर को
ज्ञान का शत-शत नमन दीपावली
हम शहीदों की करें वन्दना
देशहित पावन हवन दीपावली
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Posted in ग़ज़ल on May 25th, 2007 No Comments »
पेड़ों का पत्तों का फूलो का गान है
झरनों की कल कल में मीठी सी तान है
मेघों की गर्जन है बादल है बिजली है
कुदरत का देखो ये कैसा वरदान है
सुंदर से चेहरे है चेहरों पे लाली है
लाली में झांके भोली मुस्कान है
चोटी है घाटी है पावन सी माटी है
माटी में सोना है सोने में जान है
रंगों […]
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