मेघों की नगरी
May 25th, 2007 by Rajesh Chetan
पेड़ों का पत्तों का फूलो का गान है
झरनों की कल कल में मीठी सी तान है
मेघों की गर्जन है बादल है बिजली है
कुदरत का देखो ये कैसा वरदान है
सुंदर से चेहरे है चेहरों पे लाली है
लाली में झांके भोली मुस्कान है
चोटी है घाटी है पावन सी माटी है
माटी में सोना है सोने में जान है
रंगों का मेला है उत्सव की बेला है
मेघों की नगरी है भारत की शान है