Posted in ग़ज़ल on Jun 16th, 2007 No Comments »
जन्म दिवस पर अभिनन्दन
जीवन हो चन्दन चन्दन
हम ऐसे ही काम करें
लोग करे शत-शत वन्दन
पल-पल ऐसे भाव रहें
महक उठे मन का आँगन
देश प्रेम सबसे बढ़कर
अर्पित इस पर तन मन धन
सबको खुशियाँ बाँट सकें
ऐसा हो अपना जीवन
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Posted in ग़ज़ल on Jun 12th, 2007 2 Comments »
थे ज्ञानी विज्ञानी ओशो
ज्यूं कबीर की बानी ओशो
इस पथराई मानवता में
आये बनकर पानी ओशो
जिसने भी आँखों में झांका
उसकी बने कहानी ओशो
गीता वेद पुराण उपनिषद
गाते फिरे जुबानी ओशो
समझौतों की राह न पकड़ी
निकले स्वाभिमानी ओशो
उनका सानी कोई नहीं था
थे अपने ही सानी ओशो
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Posted in ग़ज़ल on Jun 10th, 2007 2 Comments »
देव धरा हरिद्वार हमारी गंगा मां
करती भव से पार हमारी गंगा मां
सदियों से जो संस्कारों को सींच रही
कल कल अमृत धार हमारी गंगा मां
युग युग से हर भारतवासी पूज रहा
संस्कृति का आधार हमारी गंगा मां
भागिरथ की पुण्य साधना सफल हुई
मिला देव उपहार हमारी गंगा मां
दीप आरती शंखनाद संध्या वन्दन
दिव्य-मोक्ष का द्वार हमारी गंगा मां
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Posted in ग़ज़ल on Jun 1st, 2007 No Comments »
काली माँ वरदान हमारा कलकत्ता
माँ गंगा का गान हमारा कलकत्ता
परमहंस श्री रामकृष्ण की जय बोलो
जिनकी ऊँची शान हमारा कलकत्ता
खून के बदले आजादी देने वाला
नेता हुआ महान हमारा कलकत्ता
विश्व विजयी थे संत विवेकानन्द यहाँ
बढा धर्म का मान हमारा कलकत्ता
तीन दशक से लाल बुझक्कड़ ऐठे हैं
है उनकी दुकान हमारी कलकत्ता
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