नारी
Posted in ग़ज़ल on Jul 14th, 2008 No Comments »
डालर कि दोड़ में ये लीन हो गई
अमरीका में नारी अब मशीन हो गई
आफिस में काम और घर में भी काम
काम करते करते प्रवीण हो गई
घर दफ़्तर और कार भी चलाती है
लगता ये एक में ही तीन हो गई
पश्चिम में तन और भारत में मन
देखो बिन जल की ये मीन हो गई
घर को पहुंचने में […]