Posted in ग़ज़ल on Jul 14th, 2008 No Comments »
डालर कि दोड़ में ये लीन हो गई
अमरीका में नारी अब मशीन हो गई
आफिस में काम और घर में भी काम
काम करते करते प्रवीण हो गई
घर दफ़्तर और कार भी चलाती है
लगता ये एक में ही तीन हो गई
पश्चिम में तन और भारत में मन
देखो बिन जल की ये मीन हो गई
घर को पहुंचने में […]
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Jan 29th, 2008 No Comments »
कैसा अजब नज़ारा है
हर घाटी अंगारा है
गली गली ख़ूनी जिसकी
वो कश्मीर हमारा है
किसको समझें हम अपना,
अपनों ने ही मारा है
छोड़ो बातें मौसम की,
हर मौसम हत्यारा है
माँ की आँखों में आँसू,
बेटा जो आवारा है
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Jan 29th, 2008 No Comments »
घर को आग लगाते हो
और नहीं शर्माते हो
ये हड़तालें, आगजनी
ग़लत राह क्यों जाते हो
भूखा है मज़दूर अगर
क्या उद्योग चलाते हो
कर बिजली, पानी चोरी
अपने महल बनाते हो
अधिकारों की ही चिंता
अच्छा फ़्रर्ज़ निभाते हो
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Jan 29th, 2008 No Comments »
बोस सभी से न्यारा था
नेता वही हमारा था
ख़ून के बदले आज़ादी
नेताजी का नारा था
गोरे दिल्ली से भागे
उसने जब ललकारा था
सौ करोड़ हम नतमस्तक
प्राणों से भी प्यारा था
नील गगन में चमक रहा
भारत का ध्रुवतारा था
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Jun 16th, 2007 No Comments »
जन्म दिवस पर अभिनन्दन
जीवन हो चन्दन चन्दन
हम ऐसे ही काम करें
लोग करे शत-शत वन्दन
पल-पल ऐसे भाव रहें
महक उठे मन का आँगन
देश प्रेम सबसे बढ़कर
अर्पित इस पर तन मन धन
सबको खुशियाँ बाँट सकें
ऐसा हो अपना जीवन
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Jun 12th, 2007 2 Comments »
थे ज्ञानी विज्ञानी ओशो
ज्यूं कबीर की बानी ओशो
इस पथराई मानवता में
आये बनकर पानी ओशो
जिसने भी आँखों में झांका
उसकी बने कहानी ओशो
गीता वेद पुराण उपनिषद
गाते फिरे जुबानी ओशो
समझौतों की राह न पकड़ी
निकले स्वाभिमानी ओशो
उनका सानी कोई नहीं था
थे अपने ही सानी ओशो
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Jun 10th, 2007 2 Comments »
देव धरा हरिद्वार हमारी गंगा मां
करती भव से पार हमारी गंगा मां
सदियों से जो संस्कारों को सींच रही
कल कल अमृत धार हमारी गंगा मां
युग युग से हर भारतवासी पूज रहा
संस्कृति का आधार हमारी गंगा मां
भागिरथ की पुण्य साधना सफल हुई
मिला देव उपहार हमारी गंगा मां
दीप आरती शंखनाद संध्या वन्दन
दिव्य-मोक्ष का द्वार हमारी गंगा मां
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Jun 1st, 2007 No Comments »
काली माँ वरदान हमारा कलकत्ता
माँ गंगा का गान हमारा कलकत्ता
परमहंस श्री रामकृष्ण की जय बोलो
जिनकी ऊँची शान हमारा कलकत्ता
खून के बदले आजादी देने वाला
नेता हुआ महान हमारा कलकत्ता
विश्व विजयी थे संत विवेकानन्द यहाँ
बढा धर्म का मान हमारा कलकत्ता
तीन दशक से लाल बुझक्कड़ ऐठे हैं
है उनकी दुकान हमारी कलकत्ता
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on May 29th, 2007 No Comments »
शरद ॠतु का आगमन दीपावली
दीपकों का प्रज्ज्वलन दीपावली
सत्य का डंका बजाया राम ने
झूठ का लंका दहन दीपावली
ॠषि दयानन्द ने दिखाया रास्ता
है तमस का आचमन दीपावाली
ज्ञान केवल मिल गया महावीर को
ज्ञान का शत-शत नमन दीपावली
हम शहीदों की करें वन्दना
देशहित पावन हवन दीपावली
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on May 25th, 2007 No Comments »
पेड़ों का पत्तों का फूलो का गान है
झरनों की कल कल में मीठी सी तान है
मेघों की गर्जन है बादल है बिजली है
कुदरत का देखो ये कैसा वरदान है
सुंदर से चेहरे है चेहरों पे लाली है
लाली में झांके भोली मुस्कान है
चोटी है घाटी है पावन सी माटी है
माटी में सोना है सोने में जान है
रंगों […]
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
नाग पंचमी का त्योहार
मिर्जा खूब निभाया यार
जिस थाली में दूध पीया
उसको लेकर हो गये पार
घूर रहे केसर घाटी
भूल गये करगिल की मार
ताजमहल नापाक किया
तुम निकले पक्के मक्कार
अगली नाग पंचमी का
आमंत्रण कर लो स्वीकार
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
बुन्देलों की रानी थी
हार कभी ना मानी थी
घोडे पर तलवार लिये
रानी क्या मर्दानी थी
कांप उठे गोरे जिससे
झांसी की दीवानी थी
परदेशी छोडें भारत
उसने मन मे ठानी थी
साथ सिन्धिया देता तो
आजादी मिल जानी थी
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 1 Comment »
रुप रंग में जो खोता है
प्रेम नही वह लव होता है
पश्चिम वाले क्या जाने
प्रेम का मतलब क्या होता है
प्रेम हृदय का मिलन है प्यारे
लव वाला काया ढोता है
प्रेम भला क्या छुप सकता है
प्रेमी ऑंखो से रोता है
वे क्या जाने प्रेम डगर को
जो केवल कांटे बोता है
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 2 Comments »
कुरुक्षेत्र की भूमि वाला हरियाणा
सीधा साधा भोला भाला हरियाणा
मातृभूमि की बलिवेदी पर वीरों ने
अर्पित की मुण्डों की माला हरियाणा
पंडित लख्मी गूंज रहे हैं कण कण में
काव्य सुधा का छलके प्याला हरियाणा
धर्मक्षेत्र यह कुरुक्षेत्र यह जन जन का
श्रमशक्ति का पुण्य शिवाला हरियाणा
हर पार्क मे ताऊ देवी लाल खडे
राजनीति की गडबडझाला हरियाणा
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
भारत भू के कष्ट मिटाओ श्रीगणेश
आंतकवाद को दूर भगाओ श्रीगणेश
मल्टीनेशन हमको आकर लूट रही
स्वदेशी को फिर से लाओ श्रीगणेश
पिज्जा, बर्गर, सेण्डविच बिकता भारत में
लडडू का फिर भोग लगाओ श्रीगणेश
नेता अफसर भ्रष्टाचार में डूबे हैं
सदाचार का पाठ पढाओ श्रीगणेश
बच्चा बच्चा अब तनाव से पीडित है
सबको आकर खूब हंसाओ श्रीगणेश
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
पाने को तूं सब कुछ पा
‘औ’ परदेशी घर तो आ
डालर बेशक कुछ भी है
अम्मा आखिर है अम्मा
पिज्जा बर्गर मे खोया
अपने घर की रोटी खा
पनघट तुझको खोज रहा
आकर अपनी प्यास बुझा
गाँव की मिटी लाया हूँ
अपने संग मे लेता जा
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
तूफानों का दौर हमारे आंगन में
घटा घिरी घनघोर हमारे आंगन में
लील गया भूकम्प हजारो लोगो को
नाश हुआ चहुंओर हमारे आंगन में
सत्ता की गलियों में घायल ईमां है
घुस आये है चोर हमारे आंगन में
बुद्व महात्मा हम हैं तेरे अपराधी
हुआ धर्म कमजोर हमारे आंगन में
राष्ट्रधर्म औ संस्कृति का सम्मान करे
नव संवत की भोर हमारे आंगन […]
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
नव संवत और नव उंमग
चहुं ओर उड रहा आज रंग
आतंकवाद से सभी तंग
दुनिया का बदलें रंग ढंग
समाप्त करे जेहाद जंग
संकल्प जगे कुछ अंतरंग
नव खुशियाँ और नवतरंग
इस साल उडे कुछ यूं पंतग
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
सर्दियों की कंपकपी का अन्त है
दर पे दस्तक दे रहा बसन्त है
फूल केसर का हवा में झूमता
पीत वस्त्रों में सजा ज्यूं सन्त है
काम कोई कैसे बिगड़े इस घडी
दे रहा आशीष जब इकदंत है
देखिये कुदरत की रंगत देखिये
गंध कैसी छाई दिगदिगन्त है
प्यार का खुला निमत्रंण है तुम्हे
प्रेम की भाषा सखी अनन्त है
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
नंदी पर सवार भोले शिव शंकर
भूतों के हैं यार भोले शिव शंकर
अर्ध्दनारीश्वर रूप सुहाना लगता है
गौरा से हैं प्यार भोले शिव शंकर
जटाजूट भभूत लपेटे काया है
गल सांपो का हार भोले शिव शंकर
कल्याण धरा का करने ही तो ले आये
सिर गंगा की धार भोले शिव शंकर
भारत के कण-कण पर शंकर नाम लिखा
करो राष्ट्र उद्धार भोले शिव […]
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
गांधी का उजला गुजरात
जीने की ज्वाला गुजरात
भूकम्पों को सहने में
पहला है पहला गुजरात
गरबा करता थिरक रहा
सुंदर सी बाला गुजरात
कुछ अखबारों के कारण
दुनिया में काला गुजरात
जिसने भारत को जोडा
वो पटेल वाला गुजरात
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
हरा हरा उत्तर प्रदेश
खरा खरा उत्तर प्रदेश
बाहुबलियों के कारण
डरा डरा उत्तर प्रदेश
बहना की माया देखो
चरा चरा उत्तर प्रदेश
मंदिर वालो ने समझा
भरा भरा उत्तर प्रदेश
नेता जी और अमर सिंह
मरा मरा उत्तर प्रदेश
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
राम अगर घर आएं दीवाली होती है
सब जब दीप जलाएं दीवाली होती है
मिलजुल कर सब प्रेम-प्यार से साथ रहें
चेहरे जब मुस्काएं दीवाली होती है
राम जी का नाम लेना तो अच्छा है
काम अगर अपनाएं दीवाली होती है
केवट से जब राम मिले तो ये बोले
वनवासी मिल जाएं दीवाली होती है
छप्पर वाले कोटि-कोटि जननायक का
मन्दिर भव्य बनाएं दीवाली […]
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
तूफानों का दौर हमारे आंगन में
घटा घिरी घनघोर हमारे आंगन में
लील गया भूकम्प हजारों लोगों को
नाश हुआ चहुंओर हमारे आंगन में
सत्ता की गलियों में घायल ईमां है
घुस आये हैं चोर हमारे आंगन में
शंकराचार्यो को अपराधी कहते हैं
हुआ धर्म […]
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
केशव जी को प्यारे माधव
गुरूजी आप हमारे माधव
भारत भू के नील गगन में
चम-चम करते तारे माधव
अग्नि परीक्षाओं से निकले
कभी नही थे हारे माधव
संघ शक्ति का मंत्र फूंकते
राष्ट्र रथी रखवारे माधव
जन्मशती की बेला पावन
गूंज रहे तव नारे माधव
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
जब तक कोई बात ना हो
रिश्तों की शुरूआत ना हो
प्यार नही कुछ ओर है वो
जब तक दिल का साथ ना हो
वो जीवन भी क्या जीवन
जिसमें शह और मात ना हो
क्या कोई दिन ऐसा है
जिसकी कोई रात ना हो
रिश्ते जिन्दा रहते है
यदि भीतर से घात ना हो
Read Full Post »
Posted in ग़ज़ल on Apr 21st, 2007 No Comments »
मचा हुआ हुडदंग साथियों होली में
नेता हैं बदरंग साथियो होली में
दुनिया का दादा अमरीका होता है
मोदी जी से तंग साथियो होली में
पाकिस्तानी मियां मुर्शरफ नाच रहे
लगते पूरे नंग साथियो होली में
आतंकवादियों ने घायल नेपाल किया
माओवादी जंग साथियो होली में
युध्द नही अब क्रिकेट से ये लगता है
पाक हमारे संग साथियो होली में
Read Full Post »