ओशो
May 1st, 2008 by Rajesh Chetan
ये ओशो गगन है गगन देखिये
ये ओशो चमन है चमन देखिये
है ओशो दीवानी ये दुनिया तेरी
ये ओशो वतन है वतन देखिये
ये है मुरथल धरा ओशो का गीत है
गूंजता है सदा ओशो संगीत है
ध्यान की हर घड़ी होती चर्चा यहाँ
होती वेद पुराणों की अर्चा यहाँ
झूमती है पवन मेघ का गान है
ये ओशो त्रिविर का ही वरदान है
झूमता है मन और तन देखिये ॥1॥