कन्या
May 2nd, 2008 by Rajesh Chetan
कन्या ना किसी का धन होता हैं ये तो बस एक तराना है
अब समय आ गया विदा करो इसको साजन घर जाना हैं
अब आज से ये घर दूजा है अब साजन घर ही घर होगा
तूं नाम पिता का रोशन कर सुख से ये पार सफर होगा ॥
जब माँ तुझको जन्म दिया तो माँ की आँख मे थे आँसू
अब तुमको आज विदा करते हम सब की आँखो में आँसू
जब याद तुम्हारी आयेगी ऑंखो में छलकेंगे आँसू
आँसू ही बहते रहने से नयनो में ना होगें आँसू
बस तुमको इतना ध्यान रहे निज पुरखों का सम्मान रहे
निज कुल का रखकर ध्यान सदा नित आगे कदम बढाना हैं ॥1॥
तू बडभागी मेरी बेटी तुमको सबका ही प्यार मिला
वो मात-पिता अब हैं तेरे जिन की सेवा का भार मिला
लखन सरीखे देवर हैं तुमको कैसा परिवार मिला
है धन्य तुम्हारा जीवन ही पावन नगरी ससुराल मिला
रामायण गीता याद रहे राधा सीता सी बात रहे
जीवन झरना ही बन करके नित प्यार का जल बरसाना हैं ॥ 2॥