Jan 22nd, 2008 by Rajesh Chetan
स्नेही स्वजन,
आपको नमन।
चि॰ _______ की सगाई पर
आप सबको बधाई।
सौ॰ का॰ _______ के आगमन की तैयारी
वह होगी
बिटिया हमारी
आपकी साक्षी के लिये
हम रहेंगें आभारी।
आपकी व्यस्तताओं का
रखते हुये ध्यान
भेज रहे हैं
अग्रिम आमंत्रण श्रीमान।
दिनांक _________ को
_________ में आपका अभिनन्दन
_________ परिवार का आपको वन्दन
इस कुमकुम पत्रिका के माध्यम से
आपके मस्तक पर स्वागत का चंदन।
सम्पर्क : विनयावत :
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Oct 30th, 2007 by Rajesh Chetan
दैन्य दुःखों का क्षण क्षण क्षय हो
यश वैभव हो धैर्य विनय हो
आंगन आंगन हो उजियारा
दीप पर्व शुभ मंगलमय हो
अक्षरधाम आतंकियों से जूझता
संसद भवन गोलियों से गूंजता
घोर अत्याचार बढ़ता जा रहा
कवि हृदय को क्रोध क्यों नही आ रहा
दीप अंधियारों से पूछे रास्ता
इनको भारत से भला क्या वास्ता
क्या समुद्र प्रार्थना को जानता
रावण रण के बिना क्या मानता
राघव अब मंत्रणा को तोड़िये
तीर अपना राक्षसों पर छोड़िये
आतंकियों से मुक्त जब परिवेश हो
दीपकों से जगमगाता देश हो
राम ने
आतंकवाद मिटाया
दलितों को गले लगाया
रावण को मारा, फिर
अयोध्या का सिंहासन स्वीकारा।
आजकल लोग सीधा सिंहासन पर चढ़ते हैं
इसलिये रावण नहीं
रावण के पुतले जलते हैं
आओ पुनः राम राज्य को लायें
दीपक जलायें
दीवाली मनायें
हार्दिक शुभकामनायें
राम हमारे भारत भू की शान हैं
राम हमारे ईश्वर हैं भगवान हैं
राम का सेतु टूट गया तो क्या जीना
राम तो प्यारे भारत की पहचान हैं
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Sep 27th, 2007 by Rajesh Chetan
सेवा के सरताज आपकी जय होवे
अहिंसा आवाज आपकी जय होवे
लक्ष्मी माता कुलदेवी सिंहासन पर
अग्रसैन महाराज आपकी जय होवे
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Sep 19th, 2007 by Rajesh Chetan
अपनी भाषा हिन्दी को जब अपनाओगे
हर ग्राहक के दिल में प्यारे छा जाओगे
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Sep 19th, 2007 by Rajesh Chetan
बुद्धि से क्षमा याचना
मन से क्षमा भावना
तन नतमस्तक है
खमत खामणा खमत खामणा
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Aug 28th, 2007 by Rajesh Chetan
दूर देश में बहना का मन रोता है
यादों में भाई अपने को खोता है
डाक से जिस दिन बहना की राखी आये
रक्षाबन्धन पर्व उसी दिन होता है
रक्षाबन्धन ये संदेशा लाया है
पापी दुश्मन सीमा पर गुर्राया है
सीमाओं की रक्षा करने का व्रत लो
भारत माता ने फिर हमें बुलाया है
रक्षाबन्धन पर्व बड़ा ही अच्छा है
ये रेशम का धागा कितना पक्का है
सब रिश्तों से बढकर के इस दुनिया में
बहन भाई का नाता कितना सच्चा है
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Aug 25th, 2007 by Rajesh Chetan
माटी अपनी है चन्दन
अमर शहीदों को वन्दन
राष्ट्र जगाने वालों को
शत शत मेरा अभिनन्दन
भगत सिंह बलिदानी से
गांधी जी की वाणी से
भारत यूं आजाद हुआ
वीरों की कुरबानी से
गुलामी का सूरज अस्त
अंग़्रेजों को किया था पस्त
अमर तिरंग़ा बोल रहा
मंगलमय हो पन्द्रह अगस्त
आजाद गगन को नमन
आजाद चमन को नमन
साठ वर्ष के स्वाधीन
प्यारे वतन को नमन
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Aug 25th, 2007 by Rajesh Chetan
महाभारत युद्ध रचाने को
कंस का राज हटाने को
जन्माष्टमी जन्म लिया
राक्षसी आतंक मिटाने को
बृज की माटी है चन्दन
कृष्ण कन्हैया को वन्दन
लीलाधर के आने पर
जन्माष्टमी अभिनन्दन
रास रचाने वाला जी
गाय चराने वाला जी
महाभारत के बीच खड़ा
गीता गाने वाला जी
मोहन सबसे न्यारे हैं
कृष्ण कन्हैया कारे हैं
जन्माष्टमी जन्म लिया
लगते सबसे प्यारे हैं
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