Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Aug 28th, 2007 No Comments »
दूर देश में बहना का मन रोता है
यादों में भाई अपने को खोता है
डाक से जिस दिन बहना की राखी आये
रक्षाबन्धन पर्व उसी दिन होता है
रक्षाबन्धन ये संदेशा लाया है
पापी दुश्मन सीमा पर गुर्राया है
सीमाओं की रक्षा करने का व्रत लो
भारत माता ने फिर हमें बुलाया है
रक्षाबन्धन पर्व बड़ा ही अच्छा है
ये रेशम का धागा कितना […]
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Aug 25th, 2007 No Comments »
माटी अपनी है चन्दन
अमर शहीदों को वन्दन
राष्ट्र जगाने वालों को
शत शत मेरा अभिनन्दन
भगत सिंह बलिदानी से
गांधी जी की वाणी से
भारत यूं आजाद हुआ
वीरों की कुरबानी से
गुलामी का सूरज अस्त
अंग़्रेजों को किया था पस्त
अमर तिरंग़ा बोल रहा
मंगलमय हो पन्द्रह अगस्त
आजाद गगन को नमन
आजाद चमन को नमन
साठ वर्ष के स्वाधीन
प्यारे वतन को नमन
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Aug 25th, 2007 No Comments »
महाभारत युद्ध रचाने को
कंस का राज हटाने को
जन्माष्टमी जन्म लिया
राक्षसी आतंक मिटाने को
बृज की माटी है चन्दन
कृष्ण कन्हैया को वन्दन
लीलाधर के आने पर
जन्माष्टमी अभिनन्दन
रास रचाने वाला जी
गाय चराने वाला जी
महाभारत के बीच खड़ा
गीता गाने वाला जी
मोहन सबसे न्यारे हैं
कृष्ण कन्हैया कारे हैं
जन्माष्टमी जन्म लिया
लगते सबसे प्यारे हैं
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