दीपावली
Oct 30th, 2007 by Rajesh Chetan
दैन्य दुःखों का क्षण क्षण क्षय हो
यश वैभव हो धैर्य विनय हो
आंगन आंगन हो उजियारा
दीप पर्व शुभ मंगलमय हो
अक्षरधाम आतंकियों से जूझता
संसद भवन गोलियों से गूंजता
घोर अत्याचार बढ़ता जा रहा
कवि हृदय को क्रोध क्यों नही आ रहा
दीप अंधियारों से पूछे रास्ता
इनको भारत से भला क्या वास्ता
क्या समुद्र प्रार्थना को जानता
रावण रण के बिना क्या मानता
राघव अब मंत्रणा को तोड़िये
तीर अपना राक्षसों पर छोड़िये
आतंकियों से मुक्त जब परिवेश हो
दीपकों से जगमगाता देश हो
राम ने
आतंकवाद मिटाया
दलितों को गले लगाया
रावण को मारा, फिर
अयोध्या का सिंहासन स्वीकारा।
आजकल लोग सीधा सिंहासन पर चढ़ते हैं
इसलिये रावण नहीं
रावण के पुतले जलते हैं
आओ पुनः राम राज्य को लायें
दीपक जलायें
दीवाली मनायें
हार्दिक शुभकामनायें
राम हमारे भारत भू की शान हैं
राम हमारे ईश्वर हैं भगवान हैं
राम का सेतु टूट गया तो क्या जीना
राम तो प्यारे भारत की पहचान हैं