Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Jan 22nd, 2008 No Comments »
स्नेही स्वजन,
आपको नमन।
चि॰ _______ की सगाई पर
आप सबको बधाई।
सौ॰ का॰ _______ के आगमन की तैयारी
वह होगी
बिटिया हमारी
आपकी साक्षी के लिये
हम रहेंगें आभारी।
आपकी व्यस्तताओं का
रखते हुये ध्यान
भेज रहे हैं
अग्रिम आमंत्रण श्रीमान।
दिनांक _________ को
_________ में आपका अभिनन्दन
_________ परिवार का आपको वन्दन
इस कुमकुम पत्रिका के माध्यम से
आपके मस्तक पर स्वागत का चंदन।
सम्पर्क : विनयावत :
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Oct 30th, 2007 No Comments »
दैन्य दुःखों का क्षण क्षण क्षय हो
यश वैभव हो धैर्य विनय हो
आंगन आंगन हो उजियारा
दीप पर्व शुभ मंगलमय हो
अक्षरधाम आतंकियों से जूझता
संसद भवन गोलियों से गूंजता
घोर अत्याचार बढ़ता जा रहा
कवि हृदय को क्रोध क्यों नही आ रहा
दीप अंधियारों से पूछे रास्ता
इनको भारत से भला क्या वास्ता
क्या समुद्र प्रार्थना को जानता
रावण रण के बिना क्या मानता
राघव […]
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Sep 27th, 2007 No Comments »
सेवा के सरताज आपकी जय होवे
अहिंसा आवाज आपकी जय होवे
लक्ष्मी माता कुलदेवी सिंहासन पर
अग्रसैन महाराज आपकी जय होवे
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Sep 19th, 2007 No Comments »
अपनी भाषा हिन्दी को जब अपनाओगे
हर ग्राहक के दिल में प्यारे छा जाओगे
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Sep 19th, 2007 No Comments »
बुद्धि से क्षमा याचना
मन से क्षमा भावना
तन नतमस्तक है
खमत खामणा खमत खामणा
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Aug 28th, 2007 No Comments »
दूर देश में बहना का मन रोता है
यादों में भाई अपने को खोता है
डाक से जिस दिन बहना की राखी आये
रक्षाबन्धन पर्व उसी दिन होता है
रक्षाबन्धन ये संदेशा लाया है
पापी दुश्मन सीमा पर गुर्राया है
सीमाओं की रक्षा करने का व्रत लो
भारत माता ने फिर हमें बुलाया है
रक्षाबन्धन पर्व बड़ा ही अच्छा है
ये रेशम का धागा कितना […]
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Aug 25th, 2007 No Comments »
माटी अपनी है चन्दन
अमर शहीदों को वन्दन
राष्ट्र जगाने वालों को
शत शत मेरा अभिनन्दन
भगत सिंह बलिदानी से
गांधी जी की वाणी से
भारत यूं आजाद हुआ
वीरों की कुरबानी से
गुलामी का सूरज अस्त
अंग़्रेजों को किया था पस्त
अमर तिरंग़ा बोल रहा
मंगलमय हो पन्द्रह अगस्त
आजाद गगन को नमन
आजाद चमन को नमन
साठ वर्ष के स्वाधीन
प्यारे वतन को नमन
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Posted in ग्रीटिंग कार्डस् on Aug 25th, 2007 No Comments »
महाभारत युद्ध रचाने को
कंस का राज हटाने को
जन्माष्टमी जन्म लिया
राक्षसी आतंक मिटाने को
बृज की माटी है चन्दन
कृष्ण कन्हैया को वन्दन
लीलाधर के आने पर
जन्माष्टमी अभिनन्दन
रास रचाने वाला जी
गाय चराने वाला जी
महाभारत के बीच खड़ा
गीता गाने वाला जी
मोहन सबसे न्यारे हैं
कृष्ण कन्हैया कारे हैं
जन्माष्टमी जन्म लिया
लगते सबसे प्यारे हैं
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