Posted in कविताएँ on Apr 21st, 2007 No Comments »
बहुत ठंड थी उस रात
पिताजी आये मेरे पास और बोले
ले बेटा देख ये चित्र
चुन लिया है हमने तेरा जीवन मित्र
मै चौका, पिता ने टोका
लाखें में एक है।
यूं तो अपने पिता पर पूर्ण विश्वास था
पापी मन लाचार था
सोचते विचारते पहुंचे उसके द्वार
शायद उसको भी था इन्तजार
हाथ मे चाय की ट्रे उठाये
शर्माये सकुचाये
दो सखियों के साथ
धीरे धीरे […]
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अहिंसा अवतार
भगवान महावीर
आपका 2600 वाँ
जन्म कल्याणक मनाकर भी
हम शर्मिन्दा हैं
क्योंकि आपकी
अंहिसा मर रही है और
हिंसा अभी जिंदा है
बडे धूम-धाम से मनाया
हमने आपका जन्म कल्याणक वर्ष
आतंकियों में छाया रहा पूरा हर्ष
ओसामा के धमाके
संसद में लड़ाके
कश्मीरी अंगारे और
गोधरा के हत्यारे
मानवता को चाट रहे हैं और
कुछ धर्मों के ठेकेदार
दुनियाँ को डाँट रहे हैं
आपके भक्तों ने व सरकार ने
किया […]
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निर्दोषों की हत्या को जो अपना धर्म बताते हैं
जेहादी नारों के दम पर द्वेष घृणा फैलाते हैं
जिनके फतवों के कारण धर्म आज शर्मिन्दा हैं
मानवता का हत्यारा ओसामा जब तक जिन्दा हैं
नापाक मदरसों में पढ़कर ये तालिबानी आये हैं
जिनके कारण आज विश्व में काले बादल छायें हैं
उग्रवाद की घटनाओं को अगर धर्म से जोड़ोगे
मानवता से धर्म […]
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तालिबान में
बुध्द की प्रतिमायें तोडने वालों
अल्लाह तुम्हे माफ करे
मिटा सकते हो तो मिटाओ
कोटी कोटी ह्रदयों में बसने वाले
उस बुध्द को
पत्थरों पर
बहादुरी दिखाने वालो
कायरों !
तुम्हारी कायरता ने
किया है करोडो ह्रदयों को घायल
कौन से धर्म का
परचम फहराना चाहते हो तुम
तुम्हारे अज्ञान ने
अपमानित किया है धर्म
धर्म का आवरण छोडें
ज्ञान से अपने को जोडें
बुध्द की शरण में जायें
बुध्द हो […]
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हिन्दु मुस्लिम दीवारों को
जिसने तोड गिराया था
ननकाना में जन्म लिया
नानक नाम कहाया था
मुगलों के अत्याचारो से
जन जन मन घबराया था
गुरु चरणों में आकर के
बाबर ने शीश झुकाया था
गुरु नानक ने मानवता की
घर घर अलख जगाई थी
जिसके कारण ही भारत में
नई रोशनी आई थी ।
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गान्धी जी के तीन बंदर
बुरा ना बोलो
बुरा ना सुनो और
बुरा ना देखो का संदेश गुंजाते है.
भारतीय मीडीया पर
इसका इतना गहरा असर पाते हैं
इनको केवल
बुरा ही दिखता है
बुरा ही सुनता है
और बुरा बोलना तो
इनका अधिकार है
क्योंकि
भारतीय मीडिया समाज का दर्पण नही
एक बाजार है।
बाजार यानी प्रदर्शन
प्रदर्शन यानी दिखावा
सच्चाई के साथ छलावा।
कुछ न कुछ बोलना
देश की बखिया उधेड़ना
सुर्खियाँ […]
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कभी मुनि नथमल
आज महाप्रज्ञ।
आँखो से देखता हँ तो संत
कानों से सुनता हँ तो मनीषी और
पढ़ता हँ तो दार्शनिक लगते हैं।
”अक्षर को प्रणाम” काव्य संग्रह ने
एक नया इतिहास गढ़ा जब
उनको एक कवि के रूप में पढ़ा।
ये कवितायें नही
मन्त्र हैं, अनुष्ठान है
इनमें संगीत है, तान है
प्रेक्षा है, ध्यान है
अंहिसा का ज्ञान है
सत्य की गहराई है क्योंकि
ये कवितायें […]
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महिला-आरक्षण पर
हो रही थी खुलकर चर्चा
कुछ महिलायें पढ रही थी पर्चा
सब के अपने तर्क और जबाब थे
कुछ के तो अलग ही अन्दाज थे
अंत में पत्नी पीडित अध्यक्ष बोले
जागरूकता बहुत जरुरी हैं
क्योंकी ये भारतीय लोकतन्त्र की मजबूरी हैं
जो महिला जागरूक होती हैं
पति से लडती हैं
ज्यादा जागरूक होती हैं
पडोसी से लडती हैं
और सर्वाधिक जागरूक महिला
चुनाव लडती हैं
इसलिये […]
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हिमालय यानि
ईश्वर द्वारा भारत को मिला वरदान
मां गंगा का उदगम स्थान
आयुर्वेद की खान
वैदिक व बौध्द संस्कृति का गुणगान
भारत मां के माथे की शान
नगपति महान
घायल है
जातिवाद-भाषावाद, आंतकवाद की छाया
तस्करों की माया
धर्मान्तरण का मक्क्डजाल
और दुश्मनों की कदम ताल
हिमालय पर जारी है
ये भारत के साथ
बहुत बडी गद्दारी है
हिमालय यानि भारत
भारत यानि हिमालय
भारत को बचाना है तो
हिमालय को बचाओ
सांस्कृतिक […]
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जिस प्रकार माँ सन्तानों से करती हरदम निश्छल प्यार
सुखपूर्वक बड़ा हो गय धरती माता का उपकार
हिन्दुभूमि हे मंगलकरणी पुण्यभूमि महिमा महान
तेरी […]
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पुणे यानी
उत्सव की बहार
आत्मा का श्रृंगार
जीवन का गीत
मन का संगीत
ओशो की वाणी और
प्यार की कहानी है, इसलिये
पुणे विश्व की राजधानी है ।
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दूरदर्शन का छोटा पर्दा उंगली ऊपर सदा मचलता
एक नहीं दो नहीं सैंकड़ो चैनल अदला बदला करता
शक्तिशाली इस डिब्बे में घूम रही आकाश तरगें
बचपन इसमें आज भटकता यौवन है बेडोर पतगें
सब चैनल अडल्ट हो गये रिश्तों की मर्यादा टूटी
बच्चों के संग क्या हम देखें परिवारों की किस्मत फूटी
जोड़ सके जो इस माटी से डब्बा ऐसा राग […]
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मैत्रीभाव से जिसने जग में
सबको अपने गले लगाया
सदा मिली है उसको जग से
प्रेम वृक्ष की निर्मल छाया
दो शब्दों का चमत्कार ये
जिसने हमको मोड़ दिया है
क्षमाधर्म की महिमा देखो
जिसने हमको जोड़ दिया है
जाने या अनजाने मुझसे
कभी किसी ने कष्ट उठाया
नतमस्तक हूँ क्षमा कीजीये
क्षमाभाव का शुभ दिन आया ।
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बहन ने भाई को पुकारा
आ गया
रक्षाबन्धन का त्यौहार दोबारा
फिर वहीं औपचारिकतायें
रेशम का धागा,टीका मिठाई
तुमने भी जेब मे हाथ डाला
रस्म निभाई
हो गया, रक्षाबन्धन
भैया!
ये साधारण से दीखने वाले
रेशम के धागे
धागे नही
रक्षा के बन्धन हैं
और तुम्हारे माथे पर
चमकने वाली ये रोली
रोली नही
भारत की माटी का
पावन चन्दन हैं
बहन की रक्षा का
पावन संकल्प उठाया है तुमने
तुमको बधाई
पर तुम्हारी बहन
तुमको इतनी […]
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मेरे एक मित्र हैं पदमेश
रहते हैं विदेश
करते हैं कविताई
एक दिन चिटठी आई
लन्दन आओ, कविता सुनाओ
हमने सोचा, किस्मत ने भी कैसा मंत्र है मारा
इसलिए भारत में प्रतिष्ठा पाने को
हमने तुरन्त ये आमंत्रण स्वीकारा
क्योंकी भारत में जब तक विदेश ना जाओ
कोई जानता ही नही
होगें आप महाकवि
पर कोई मानता ही नही
राम-रामा
कृष्ण-कृष्णा
योग-योगा और
आयुर्वेद आयुर्वेदा बनकर
जब भारत में प्रतिष्ठा पा […]
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हंसना और हंसाना मित्रों मुझको भी तो आता है
द्विअर्थी संवादों से मन मेरा घबराता है
भौंडे फिल्मी गाने सुनना हमें सुहाना लगता है
सँस्कारों की अर्थी पर फूल चढाना पड़ता है
पश्चिम का ये नंगापन हमको तो स्वीकार नही
इस बेशर्मी का सब मिलकर करते क्यों प्रतिकार नही
युवा पीढी बरबादी से मन मेरा जब डरता है
वातावरण देखकर मुझको आग […]
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हिन्दु दर्शन का पावन झण्डा
दुनिया में फहराया था
राम कृष्ण परमहंस को
अपना गुरु बनाया था
दीन दुखी भारतवासी पर
अपना प्यार लुटाया था
सेवा को ही मिशन बनाकर
सबको गले लगाया था
विश्व पटल पर भारत भू की
जिसने धूम मचाई थी
भारत माँ के इस बेटे ने
माँ की लाज बचाई थी ।
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