आजीवन कारावास
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
| बहुत ठंड थी उस रात पिताजी आये मेरे पास और बोले ले बेटा देख ये चित्र चुन लिया है हमने तेरा जीवन मित्र मै चौका, पिता ने टोका लाखें में एक है। यूं तो अपने पिता पर पूर्ण विश्वास था पापी मन लाचार था सोचते विचारते पहुंचे उसके द्वार शायद उसको भी था इन्तजार हाथ मे चाय की ट्रे उठाये शर्माये सकुचाये दो सखियों के साथ धीरे धीरे कदमों को बढाये कमरे में आते ही कहा नमस्कार। हमने पूछा क्या आप ही हैं उम्मीदवार उम्मीदवार? उम्मीदवार नही वोटर हैं उम्मीदवार तो हैं आप उम्मीदवार ही तो वोटर के घर आता है वोटर को रिझाता है ठीक है ! ठीक है ! वोटर जी क्या ये दोनो सखिया भी वोट डालने आई हैं नही नही ये तो आलरेडी हो चुकी पराई हैं लगता है पॉलटिकल साईंस का आपको अधिक ज्ञान है पॉलटिक्स में तो हम सब महान है भाई पार्षद पिता विधायक और बाबा संसद की सीढ़ी चढे हैं पॉलटिक्स तो हम अपने घर पर ही पढ़े हैं वैसे कहाँ तक की है पढाई? जी बी ए किया हैं किस सब्जेक्ट में? सबजेक्ट नही ओबेजेक्ट पूछिये? |
डिगरी लेने किस कॉलेज से ? कॉलेज से नही किताबों से कॉलेज तो कभी कभी जाते थे पिकनिक मनाने। लगता पिकनिक आपकी हॉबी है हाँ हाँ भारत तो क्या अमरीका, चीन, जापान पूरी दुनिया का चक्कर लगाया है तब तो भूगोल का आपको अच्छा ज्ञान होगा क्यों नही क्यों नही वहाँ भी तो हमने एक सप्ताह बिताया है हमने सखियों से पूछा क्या आप भी भूगोल जाकर आई हैं? नही नही हमने तो भूगोल में ही डिग्री पाई है। सखियों से बात करना उनको नही सुहाया हमको समझाया वोटर ये नही हम हैं सवाल हमसे कीजीये हमने कहा लीजीये टी वी देखा है टी वी तो मेरे जीवन का सहारा है और ”मुजरिम हॉजिर है” सीरीयल मुझे सबसे प्यारा है। इतना सुनते ही मै स्वयं को टी वी सीरीयल मे ले आया उसको जज और अपने आप को मुजरिम पाया ठक ठक की आवाज के साथ उसने घोषणा की कहाँ थे आप? इक्कीस वर्ष तक खोजा है अब ना कोई धोखा है उसने कलम उठाई और दे दिया हमे आजीवन कारावास । |