कविवर महाप्रज्ञ
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
कभी मुनि नथमल
आज महाप्रज्ञ।
आँखो से देखता हँ तो संत
कानों से सुनता हँ तो मनीषी और
पढ़ता हँ तो दार्शनिक लगते हैं।
”अक्षर को प्रणाम” काव्य संग्रह ने
एक नया इतिहास गढ़ा जब
उनको एक कवि के रूप में पढ़ा।
ये कवितायें नही
मन्त्र हैं, अनुष्ठान है
इनमें संगीत है, तान है
प्रेक्षा है, ध्यान है
अंहिसा का ज्ञान है
सत्य की गहराई है क्योंकि
ये कवितायें लिखी नहीं अपितु
संत के जीवन की पुण्याई है
अक्षर-अक्षर नयनाभिराम
कविवर महाप्रज्ञ को
शत-शत प्रणाम॥