प्रार्थना
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
जिस प्रकार माँ सन्तानों से करती हरदम निश्छल प्यार
सुखपूर्वक बड़ा हो गय धरती माता का उपकार
हिन्दुभूमि हे मंगलकरणी पुण्यभूमि महिमा महान
तेरी काया तब चरणों में नमस्कार माँ बारम्बार
अंगभूत हम हिन्दुराष्ट्र के परम पिता प्रणाम लीजिये
कार्य तुम्हारा पूर्ण कर दें हमको ये वरदान दीजिये
अजय-शक्ति हो पास हमारे शील विनय से जग को जीतें
कंटक पथ जो अपनाया है ज्ञान कराकर सुगम कीजिये
वीरव्रती हो हृदय हमारा इह परलोक भी हिल जायेगा
तीव्र हृदय निष्टा कारण मन दरवाजा खुल जायेगा
विजय शालिनी शक्ति द्वारा धर्म बचाना बहुत जरूरी
राष्ट्र परम वैभव की चोटी निश्चित हमको मिल जायेगा ।