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जय हो तेरी शारदे माँ
हैं सभी तेरे पुजारी
ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने
आरती तेरी उतारी
वेद की पावन ॠचाएँ
तेरे कारण ही सँवरती
सप्त स्वर की दिव्य ध्वनि से
तू धरा की नींद हरती
तेरी वीणा के सुरों में
विश्व मंगल राग गूंजे
शारदे तेरा उपासक
तेरे शुभ चरणों को पूजे
तेरे मन्दिर में यहाँ माँ
काव्य संध्या सज रही है
तेरे हर साधक के स्वर […]
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लाज तुम्हारे हाथ माँ, क्षमा करो हर भूल
जीवन मेरा धन्य हो यदि पाउँ पग-धूल
यदि पाउँ पग-धूल, लेखनी चलती जाए
दो मुझको वरदान यह जीवन सफल कहाए
मीरा,सूर, कबीर के, शीश धरा ज्यों ताज
मैं भी सुत हूँ आपका, रखना मेरी लाज
रखना मेरी लाज, रहूँ मैं सदा ही ‘चेतन’
काव्य-पुष्प नव नित्य करुँ माँ तुम्हें समर्पण
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अभिनन्दन है उन वीरों का
जीवन तिल तिल जला गए जो
राष्ट्र-प्रेम का पाठ पढाकार
हमको जीना सिखा गए जो
आज प्रकाशित दसों दिशाएँ
देव-शक्तियाँ जाग उठी हैं
जाग उठा है सोया भारत
असुर-शक्तियाँ भाग उठी हैं
आओ मिलकर देश-भक्ति की
दीपशिखा को और बढाएँ
आज़ादी लाई है खुशियाँ
घर घर मंगल दीप जलाएँ
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हवा विषैली है पश्चिम की
यहाँ न इसको बहने दो
भारत को भारत रहने दो
घर अपना मत ढहने दो ॥
निज पुरखों ने बलिदानों से
जिसको जग-सिरमौर बनाया
भारत को ‘सोने की चिड़िया’
सारी दुनिया ने बतलाया
मानवता हित पूर्ण विश्व को
हमने गीता-ज्ञान दिया था
जो भी आया, हमने उसको
भाई कहकर मान दिया था
आस्तीन के साँपों! तुमको
हमने गीता-ज्ञान दिया था
जो भी आया, हमने […]
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क्या खोया है, क्या पाया है
आज तुम्हें बतलाते हैं
आओ साथियों, देशवासियो
भारत तुम्हें दिखाते हैं ॥
जिस गौ को गौमाता कहकर
गाँधी सेवा करते थे
जिसके उर में सभी देवता
वास हमेशा करते थे
हिन्द भले ही मुक्त हुआ हो
गौमाता बेहाल अभी
कटती गऊएँ किसे पुकारें
उनके सर है काल अभी
गौमाता की शोणित-बूँदें
जब धरती पर गिरती हैं
तब आज़ादी की […]
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लन्दन, अमरीकी महलों से
सुन्दर अपनी ही कुटिया है
विश्व गगन में उड़ने वाली
भारत सोने की चिड़िया है
अपनी धरती अपनी माटी
अपनी माँ तो माँ होती है
परदेशी झूठन के ऊपर
देशभक्ति हर दम रोती है
जो कुछ रुखा-सुखा हमको
अपने घर पर मिल जाएगा
उससे ही अपनी धरती पर
खूब ग़ुज़ारा हो जाएगा
अपने प्रतिभाशाली बेटे
अब परदेश नहीं जाएँगे
उनको जो कुछ भी पाना है
राष्ट्र […]
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घर घर हुए हिरण्याकश्यप
कैसे अब प्रहलाद बचेगा
दुष्ट होलिका हँसती हम पर
कौन होलिका-दहन करेगा
अग्नि परीक्षा प्रहलादों की
लेते अभी हिरण्याकश्यप
अग्नि परीक्षा सीताओं की
होगी कितनी और, परंतप
द्रोण ! अँगुठा एकलव्य को
कब तक और हारना होगा
कब तक राम भेजकर वन में
रावण हमें मारना होगा
कितनी पदमनियों के जौहर
हमको उअर दिखेंगे आखिर
और चिताओं पर विरों की
कब तक हाथ सिकेंगे आखिर
कदम-कदम पर […]
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अँग्रेजी सन को अपनाया
विक्रम संवत भुला दिया है
अपनी संस्कृति, अपना गौरव
हमने सब कुछ लुटा दया है॥
जनवरी-फरवरी अक्षर-अक्षर
बच्चों को हम रटवाते हैं
मास कौन से हैं संवत के
किस क्रम से आते-जाते हैं
व्रत, त्यौहार सभी अपने हम
संवत के अनुसार मनाते
पर जब संवतसर आता है
घर-आँगन क्यों नहीं सजाते
माना तन की पराधीनता
की बेड़ी तो टूट गई है
भारत के मन की […]
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महावीर की वाणी से हम,
नवयुग का निर्माण करेंगे
उनके पदचिन्हों पर चलकर,
धरती का कल्याण करेंगे ॥
मन्त्र अहिंसा, महावीर का
गाँधी जी ने अपनाया था
इसी मन्त्र के चमत्कार से
भारत दुनिया पर छाया था
अँग्रेज़ों की इक-इक गोली
सत्याग्रह से शर्मिंदा थी
हिंसा यूँ मर गई सदा को
और अहिंसा ही ज़िन्दा थी
तोप, टैंक बौने लगते थे
हर आयुध बेकार हो गया
धर्म, […]
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लोकतन्त्र का चेहरा कलुषित,
नेता भ्रष्टाचारी है
हम इन धृतराष्ट्रों को ढोएँ,
ऐसी क्या लाचारी है ?
सिंहासन कब तक झेलेगा
लंगड़े-लूले शासक को
आओ मिलकर सबक़ सिखा दें
हर शोषक, हर त्रासक को
रामराज्य के झूठे नारे
आसमान में गूँज रहे
हंसों को बनवास दिलाकर
हम कागों को पूज रहे
गाँधी, नेहरू के चित्रों से
शोभित इनके बँगले हैं
लेकिन उनके आदर्शों पर
निश-दिन इनके हमले हैं
आज विश्व में […]
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जैसे अँग्रेज़ी ही सब कुछ
इसके बिना नही कुछ जैसे
रूस, चीन, जापान, जर्मनी
फिर सबसे आगे हैं कैसे ?
छोटे-छोटे देश गर्व से
अपनी भाषा बोल रहे हैं
एक अभागे हम हैं ऐसे
हिन्दी को कम तोल रहे हैं
सौ करोड़ की इस भाषा का
दुनिया कब सम्मान करेगी
कब भारत की गली-गली से
अँग्रेज़ी प्रस्थान करेगी
हम अँग्रेज़ी को तज देंगे
आओ यह सकल्प उठाएँ
हिन्द निवासी, […]
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हस्ताक्षर तक हम करते हैं
एक विदेशी भाषा में
माना हम आज़ाद हो गए
लेकिन किस परिभाषा में ?
जन्म-दिवस पर केक काट कर
गाते हम अँग्रेज़ी में
शादी-ब्याह तलक की चिट्ठी
छपवाते अँग्रेज़ी में
घोड़ी डोली के स्वागत को
बैण्ड बजा अँग्रेज़ी में
टाई कस कर हर बाराती
ख़ूब सजा अँग्रेज़ी में
सड़को पर हम नाच रहे हैं,
जाने किस प्रत्याशा में ?
माना हम आज़ाद हो गए
लेकिन […]
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अणु-शक्ति के सन्धानों में
भारत की ख़ुद्दारी है
अपने दम-ख़म, अपने बल पर,
जीने की तैयारी है
पास-पड़ौसी जब देखो तब
आँख दिखाने लगते हैं
भाड़े के हथियार उठाकर
रौब जमाने लगते हैं
शान्ति-सुलह का अभिनय करते
सीमा में घुस आते हैं
सन्धि-वार्ता का धोखा दे
हमले करते जाते हैं
सहनशीलता की भी मित्रो !
इक निश्चित हद होती है
हद से ज़्यादा सहन करो तो
दुनिया मे भद होती […]
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बिक सकते हैं कुर्सी वाले
लेकिन देश तुम्हारा है
मत छोड़ो कश्मीर साथियो
माँ ने तुम्हे पुकारा है ॥
कल पुरखों ने दी क़ुर्बानी
शीश चढ़ाए माटी पर
आज हमे भी चलना होगा
बलिदानी परिपाटी पर
आओ मिलकर बलिदानों की
परम्परा की लाज रखें
रक्त चाहिए मातृ-भूमि को
उसकी इच्छा आज रखें
भारत माता की रक्षा का
दृढ़ संकल्प हमारा है
मत छोड़ो कश्मीर साथियो
माँ ने तुम्हे पुकारा है […]
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अपनी काली करतूतों से
मिट जाएगा पाकिस्तान
रावलपिन्डी से आगे तक
फिर से होगा हिन्दुस्तान
भारत माता का कन्धा है
जिस पर पापी बैठा है
तुझपे तेरा अपना क्या है
जिस पर इतना ऐंठा है
मार पड़ेगी अबकी इतनी
घर-घर होगा क़ब्रिस्तान
पैंसठ और इकहत्तर को तू
शायद बिल्कुल भूल गया
भीख में कुछ हथियार मिले तो
तू ज़्यादा ही फूल गया
करगिल में इस गद्दारी का,
ब्याज़ सहित भुगता […]
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‘पृथ्वी’-परीक्षण किया जो हमने
तुमने ‘गौरी’ लिया उधार
पाँच धमाकों को सुनकर तो
पड़ गई तुम पर भारी मार
भारत अपने बल-बूते है
तुम इमदाद करो स्वीकार
रोटी तक का दाँव लगाकर
माँगो तुम सबसे हथियार
करगिल-काश्मीर में तुमने
करवाया जो नर-संहार
थू-थू की तुम पर दुनिया ने
सबने दिया तुम्हें दुत्कार
जब-जब छेड़ा तुमने हमको
हमने तुम्हें लगाई मार
अब जो युद्ध हुआ तो होगा
रावलपिन्डी पर अधिकार
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भारत-भू पर देश भक्ति की
कैसी अलख जगाई है
भारत-माँ के बेटो तुमको
सौ-सौ बार बधाई है ॥
परम शक्ति है पास हमारे
हमने यह दिखलाया है
औ’ कम्प्यूटर में भी हमने
भारी नाम कमाया है
सी टी बी टी वालों को भी
हमने ही धमकाया है
भारत के गौरव का झण्डा
दुनिया पर फहराया है
हिन्दुस्तानी वैज्ञानिक ने
कैसी धूम मचाई है
भारत-माँ के बेटो तुमको
सौ-सौ बार बधाई […]
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बाबा साहब भीम राव जी
संविधान-निर्माता थे
हरिजन्, गिरिजन, दलितजनों के
सच्चे भाग्य विधाता थे
भारत जैसा लोकतन्त्र कब
इस दुनिया में दूजा है
बाबा साहब ने इसको ही
इष्ट बनाकर पूजा है
आओ उनके आदर्शों का
मिलकर हम सम्मान करें
ऊँच-नीच का भेद मिटाकर
भारत का निर्माण करें
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अग्र-शिरोमणि अग्रसैन ने
अग्रोहा निर्माण किया था
एक रूपैया, एक ईंट से
नवयुग का आह्वान किया था
अपने पावन दिव्य-तेज से
कैसा सुन्दर बाग़ लगाया
महक रहा है सारा भारत
पाकर जिसकी अनुपम छाया
दान, दया, करूणा के सागर
हे भारत के भाग्य-विधाता
युगों युगों से गुँज रही है
तेरे पुत्रों की यश गाथा
हे महाराजा अग्रसैन जी
अभिनन्दन स्वीकार कीजिए
जीत सकें हम जन मानस को
हमको यह वरदान […]
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क्या क़ीमत है आज़ादी की
हमने कब यह जाना है
अधिकारों की ही चिन्ता है
फर्ज़ कहाँ पहचाना है
आज़ादी का अर्थ हो गया
अब केवल घोटाला है
हमने आज़ादी का मतलब
भ्रष्टाचार निकाला है
आज़ादी में खा जाते हम
पशुओं तक के चारे अब
‘हर्षद’ और ‘हवाला’ हमको
आज़ादी से प्यारे अब
आज़ादी के खेल को खेलो
फ़िक्सिंग वाले बल्लों से
हार के बदले धन पाओगे
‘सटटेबाज़ों’ दल्लों से
आज़ादी […]
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निगम पार्षद नोट कमाता
एम एल ए विश्वास गँवाता
सांसद अपना शर्मिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥
व्यवसायी हर टैक्स बचाता
अध्यापक ट्यूशन की खाता
पत्रकार इक कारिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥
डाँक्टर भारी लूट मचाता
अभियन्ता अभियान चलाता
बेघर हर इक बाशिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी ज़िन्दा है ॥
है किसान क़िस्मत का मारा
नेताओं में बँटता चारा
रिश्वतख़ोरी ताबिन्दा है
लोकतन्त्र फिर भी […]
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ख़ूब निभाया नेताओं ने भाई चारा है
इन्हें विदेशी भाई चारा बेहद प्यारा है
सन् बासठ में हिन्दी-चीनी भाई चारा था
‘हिन्दी-चीनी भाई-भाई’ गूँजा नारा था
चाओ, माओ भाई-भाई कहते चढ आए
चुपके चुपके भारत की सरहद में बढ आए
और हज़ारों वर्गमील धरती को दाब लिया
तिब्बत को तो पूरे का पूरा ही चाब लिया
विश्व शान्ति का […]
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विश्व जीतने वाला घोड़ा हमने ही तो छोड़ा है
परमाणु से हमने जग को मैत्री युग से जोड़ा है
अमेरिका भी हमको अपने घर पर आज बुलाता है
रुस हमारे घर पर आकर समझौता कर जाता है
अप्ने डाँक्टर वैज्ञानिक तो दुनिया भर में छाये हैं
कम्प्यूटर में हमने जग के कीर्तिमान बनाये हैं
विश्व जीत कर जिस दिन भारतवासी घर […]
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भारती के भाल का सम्मान वन्देमातरम्
देश हित की भावना का मान वन्देमातरम्
जब कभी भी इस धरा पर कोई संकट आ पड़े
मंत्र सम है गूँजता वरदान वन्देमातरम्
भिन्न भाषा, भिन्न भूषा, भिन्न इसकि बोलियाँ
भिन्नता में एकता पहचान वन्देमातरम्
इस गगन में अब लहरता राष्ट्र का झण्डा अमर
इस तिरंगे की अमिट है शान वन्देमातरम्
अब करोड़ों हाथ अपने राष्ट्र को […]
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पूजा करो सभी की, लेकिन
प्रथम देवता देश को मानो
देश बड़ा है सब धर्मों से
इस सच्चाई को पहचानो
अपने नेता ज़ोर-ज़ोर से
मन्दिर-मस्जिद चिल्लाते हैं
इन नारों के दम पर ही तो
ये संसद में आ पाते हैं
मन्दिर वाले वोट मिलेंगे
जाति-वाद के अंगारों से
मस्ज़िद वाले वोट मिलेंगे
हिन्दू-मुस्लिम दीवारों से
देश-प्रेम कैसा, जब नेता
कुर्सी पर जाएँ बलिहारी
तुझको फिर से आना होगा
भारत-भू पर […]
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