मुक्तक-1
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
| ———————————————- राजनीति का तीर नही बिहार सखे दु:ख पीडा तस्वीर नही बिहार सखे बुद्ध और महावीर की धरती पावन ये लालू की जागीर नही बिहार सखे ———————————————- मजदूरों की प्यारी नेता वृन्दा जी बाबा के गल डाल दिया है फन्दा जी मल्टीनेशन भी तो भारत में चमके बन्द करो ये आयुर्वेद का धन्धा जी ———————————————- पंथ खालसा परम्परा का ध्यान रहे गुरू भूमि इस भारत का सम्मान रहे मान सोनिया का करना है भले करो दिल में सबसे पहले हिन्दुस्तान रहे ———————————————- |
———————————————- चेत बेसाखी प्यारे भाई अपनी है वाईफ उनकी और लुगाई अपनी है जनवरी फरवरी रट लेने से क्या होगा ईयर न्यू अग्रेंज बधाई अपनी है ———————————————- नये साल में चंहु ओर खुशहाली हो सबके घर में रोज रोज दीवाली हो अटल बिहारी पथ पर कोई ना जाये कुंआरों की भी शादी हो घरवाली हो ———————————————- रिश्वत देकर तुमने घर क्यूं बनवाया भ्रष्टाचारी अफसर ने ये समझाया न्यायालय की बातें बिल्कुल सच्ची है इस कारण ही बुल्डोजर लेकर आया ———————————————- |