मुक्तक-3
Apr 21st, 2007 by Rajesh Chetan
| ———————————————- माँ का सुमिरन कर रहा संसार है माँ ही तो इस सृष्टि का आधार है आ गया जो भी यहाँ दरबार में उसका बेडा हो गया बस पार हैं ———————————————- सिध्दार्थ त्रिशला नन्दन महावीर सुखदाई और दु:ख भंजन महावीर जन्म दिवस की भारत भू पर धूम मची शत शत वंदन अभिनंदन महावीर ———————————————- नवीन तुमने क्या नवीन काम किया है घर घर को तुमने ही तिरंगा धाम किया है जिंदल तुम्हारी जिंदादिली याद रहेगी वनवासी तिरंगे को राजा राम किया है ———————————————- |
———————————————- मन में सेवा भाव जगे क्या राज है कानों में भारत माँ की आवाज है औरों के कष्टों में आँखे गीली जब समझो द्वारे अग्रसेन महाराज है ———————————————- कैसै कैसै मरते लोग झूठी बातें करते लोग दर्पण देख लिया होता फिर खुद से ही डरते लोग ———————————————- मीरा और कबीर हो तुम बुद्ध और महावीर हो तुम ओशो तेरे रूप अनेक कृष्ण की तस्वीर हो तुम ———————————————- |