मुक्तक-5
Posted in मुक्तक on May 30th, 2007 No Comments »
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धर्म दुकानों का जिसने प्रतिकार किया
वेदों को ही जीवन में स्वीकार किया
शत् शत् वन्दन ॠषि दयानन्द को करते
आर्य समाज को भारत में साकार किया
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नकली नकली ही सारा व्यवहार मिला
अंग्रेजी में सारा कारोबार मिला
विमानों में हिन्दी का सम्मान नहीं
सीट सीट पर अंग्रेजी अखबार मिला
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द्वेष की बढती लहर आरक्षण है
प्रतिभाओं पर बढता कहर आरक्षण है
नेताओं ने इस […]