मुक्तक-4
May 30th, 2007 by Rajesh Chetan
| ———————————————- काव्य की सरिता सुहानी ला रहा धर्मनगरी की कहानी गा रहा कौन कहता है गया हूँ छोड़कर मैं भिवानी गीत गाने आ रहा ———————————————- पावन परम चरित्र हमारे स्वामी जी वनवासी के मित्र हमारे स्वामी जी भारत माता मंदिर का निर्माण किया राष्ट्र भक्ति का चित्र हमारे स्वामी जी ———————————————- बासन्ती आँखों में जीवन पाते हो चोली वाले गीत झूम कर गाते हो घायल माता प्यारे तुमसे पूछ रही क्या बेटा होने का फर्ज निभाते हो ———————————————- |
——————————————————- टी वी चैनल का युग आया सांसद तनिक नहीं शर्माया जनता ने भी झूम झूम कर बकरीद त्यौहार मनाया ——————————————————– उँची उँची दुकानों पर फीके ही पकवान मिले उँचे उँचे उद्योगों की नीवों में तूफान मिले देख भाल के चलना मित्रों कदम कदम पर धोखा है चौराहे पे राम से लड़ते हमको तो हनुमान मिले ——————————————————– कैसे पूरा देश साथियों दिल्ली अन्दर आ सकता है दिल्ली सिंहासन पर चढ़कर भारत देखा जा सकता है अगर राम सी दृष्टि होती भारत के सब नेताओं की बच्चा बच्चा अपने घर पर राजा का सुख पा सकता है ——————————————————- |