मुक्तक-7
Posted in मुक्तक on Jun 13th, 2007 No Comments »
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देहरी उपर दीप जलाना अच्छा है
अन्धकार को दूर भगाना अच्छा है
बाहर लाखों दीप जले हैं जलने दो
भीतर मन का दीप जलाना अच्छा है
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प्यार मीरा प्यार राधा प्यार ही रसखान है
प्यार जिसको हो गया महकता इन्सान है
नफरतों को छोड़ बन्दे प्यार करना सीख ले
प्यार जिसने पा लिया तो पा लिया भगवान है
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दिल से दिल की बढ़ती […]