मुक्तक-6
Jun 7th, 2007 by Rajesh Chetan
| ———————————————- जिंदगी में दिन मिले बस चार हैं कर रहें हम रोज ही व्यापार हैं प्यार जिस दिन हो गया तो मानिये जिंदगी में रोज ही त्यौहार हैं ———————————————- वो हमारे घर में जब से आ गये सारी दुनिया की खुशी हम पा गये जबसे हमने प्यार का सीखा सबक हम दिलों की धड़कनों में छा गये ———————————————- प्यार में वो जाफरानी हो गई इक मोहब्बत की कहानी हो गई प्यार के रंग में रंगी तो देखिये श्याम की मीरा दीवानी हो गई ———————————————- |
——————————————————- गुल के बदले मिल रहे अब खार है जब से आँखें हो गई बस चार हैं बोलते है हो गया है लव उन्हें जिस्म से ही लोग करते प्यार हैं ——————————————————– प्यार से मीठी ना कोई तान है प्यार की होती नहीं दुकान है नफरतों को छोड़ सब मिल कर कहें प्यार ही तो इस धरा की शान है ——————————————————– नदी का सागर में समाना समर्पण नहीं मजबूरी है पेड़ का जमीन में गड़ जाना समर्पण नहीं मजबूरी है ईश चरणों में मन लगा तो समर्पण जानो मौत से रिश्ता निभाना समर्पण नहीं मजबूरी है ——————————————————- |