मुक्तक-9
Posted in मुक्तक on Dec 13th, 2007 No Comments »
कवि धर्म को आज निभाना ही होगा
वन्देमातरम फिर से गाना ही होगा
चन्दबरदाई की नगरी बोल रही
कविता को हथियार बनाना ही होगा
——————————-
बसन्त हो बहार हो
ज्ञान का सत्कार हो
माँ यहीं आशीष देना
लेखनी तलवार हो
——————————