मुक्तक-9
Dec 13th, 2007 by Rajesh Chetan
कवि धर्म को आज निभाना ही होगा
वन्देमातरम फिर से गाना ही होगा
चन्दबरदाई की नगरी बोल रही
कविता को हथियार बनाना ही होगा
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बसन्त हो बहार हो
ज्ञान का सत्कार हो
माँ यहीं आशीष देना
लेखनी तलवार हो
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