Posted in मुक्तक on Dec 13th, 2007 No Comments »
कवि धर्म को आज निभाना ही होगा
वन्देमातरम फिर से गाना ही होगा
चन्दबरदाई की नगरी बोल रही
कविता को हथियार बनाना ही होगा
——————————-
बसन्त हो बहार हो
ज्ञान का सत्कार हो
माँ यहीं आशीष देना
लेखनी तलवार हो
——————————
Read Full Post »
Posted in मुक्तक on Nov 1st, 2007 No Comments »
———————————————-
भूखी ये जनता रोटी से दूरी है
नंगा है तन कपड़ा जरूरी है
जनता की आंखों में जब तक हैं आंसू
आजादी समझो तब तक अधूरी है
———————————-
साजिशें चहुंओर दिखाई देती है
दिल्ली कुर्सी चोर दिखाई देती है
न्यायालय में सरकारी साजिश देखी
संसद भी कमजोर दिखाई देती है
——————————————————
शत्रु सम्मुख डटे रहे और हार कभी ना मानी
आजादी के लिये दे गये जो […]
Read Full Post »
Posted in मुक्तक on Jun 13th, 2007 No Comments »
———————————————-
देहरी उपर दीप जलाना अच्छा है
अन्धकार को दूर भगाना अच्छा है
बाहर लाखों दीप जले हैं जलने दो
भीतर मन का दीप जलाना अच्छा है
———————————————-
प्यार मीरा प्यार राधा प्यार ही रसखान है
प्यार जिसको हो गया महकता इन्सान है
नफरतों को छोड़ बन्दे प्यार करना सीख ले
प्यार जिसने पा लिया तो पा लिया भगवान है
———————————————-
दिल से दिल की बढ़ती […]
Read Full Post »
Posted in मुक्तक on Jun 7th, 2007 No Comments »
———————————————-
जिंदगी में दिन मिले बस चार हैं
कर रहें हम रोज ही व्यापार हैं
प्यार जिस दिन हो गया तो मानिये
जिंदगी में रोज ही त्यौहार हैं
———————————————-
वो हमारे घर में जब से आ गये
सारी दुनिया की खुशी हम पा गये
जबसे हमने प्यार का सीखा सबक
हम दिलों की धड़कनों में छा गये
———————————————-
प्यार में वो जाफरानी हो गई
इक मोहब्बत की […]
Read Full Post »
Posted in मुक्तक on May 30th, 2007 No Comments »
———————————————-
धर्म दुकानों का जिसने प्रतिकार किया
वेदों को ही जीवन में स्वीकार किया
शत् शत् वन्दन ॠषि दयानन्द को करते
आर्य समाज को भारत में साकार किया
———————————————-
नकली नकली ही सारा व्यवहार मिला
अंग्रेजी में सारा कारोबार मिला
विमानों में हिन्दी का सम्मान नहीं
सीट सीट पर अंग्रेजी अखबार मिला
———————————————-
द्वेष की बढती लहर आरक्षण है
प्रतिभाओं पर बढता कहर आरक्षण है
नेताओं ने इस […]
Read Full Post »
Posted in मुक्तक on May 30th, 2007 No Comments »
———————————————-
काव्य की सरिता सुहानी ला रहा
धर्मनगरी की कहानी गा रहा
कौन कहता है गया हूँ छोड़कर
मैं भिवानी गीत गाने आ रहा
———————————————-
पावन परम चरित्र हमारे स्वामी जी
वनवासी के मित्र हमारे स्वामी जी
भारत माता मंदिर का निर्माण किया
राष्ट्र भक्ति का चित्र हमारे स्वामी जी
———————————————-
बासन्ती आँखों में जीवन पाते हो
चोली वाले गीत झूम कर गाते हो
घायल माता प्यारे तुमसे […]
Read Full Post »
Posted in मुक्तक on Apr 21st, 2007 No Comments »
———————————————-
माँ का सुमिरन कर रहा संसार है
माँ ही तो इस सृष्टि का आधार है
आ गया जो भी यहाँ दरबार में
उसका बेडा हो गया बस पार हैं
———————————————-
सिध्दार्थ त्रिशला नन्दन महावीर
सुखदाई और दु:ख भंजन महावीर
जन्म दिवस की भारत भू पर धूम मची
शत शत वंदन अभिनंदन महावीर
———————————————-
नवीन तुमने क्या नवीन काम किया है
घर घर को तुमने ही तिरंगा […]
Read Full Post »
Posted in मुक्तक on Apr 21st, 2007 No Comments »
———————————————-
जहाँ कहीं भी नई रोशनी छाई है
जहाँ कही भी जीवन की सच्चाई है
दुनिया वाले चाहे उसको धर्म कहे
सच कहता हूँ भारत की परछाई है
———————————————-
आशा और विश्वास चाहिये
जीवन में मधुमास चाहिये
दिन गिनती करने से क्या है
पिया मिलन की प्यास चाहिये
———————————————-
होती ध्यान योग परिचर्चा भारत है
नियोजन से होता खर्चा भारत है
कट्टरता को हमने कब स्वीकार किया
खुले रूप […]
Read Full Post »
Posted in मुक्तक on Apr 21st, 2007 No Comments »
———————————————-
राजनीति का तीर नही बिहार सखे
दु:ख पीडा तस्वीर नही बिहार सखे
बुद्ध और महावीर की धरती पावन ये
लालू की जागीर नही बिहार सखे
———————————————-
मजदूरों की प्यारी नेता वृन्दा जी
बाबा के गल डाल दिया है फन्दा जी
मल्टीनेशन भी तो भारत में चमके
बन्द करो ये आयुर्वेद का धन्धा जी
———————————————-
पंथ खालसा परम्परा का ध्यान रहे
गुरू भूमि इस भारत का सम्मान […]
Read Full Post »